क्या एसआईआर का मकसद पारदर्शिता लाना है? गुलाम अली खटाना
सारांश
Key Takeaways
- एसआईआर का उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
- टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
- गुलाम अली खटाना ने ममता बनर्जी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची से बाहर रखने का प्रयास है।
- चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाना विपक्ष की रणनीति है।
नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इसका विरोध कर रही है, जिससे प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाया है। इस बीच, भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने ममता सरकार पर तीखा हमला किया।
गुलाम अली खटाना ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "टीएमसी इस मुद्दे पर कोर्ट जाए या चुनाव आयोग से चर्चा करे। एसआईआर का एकमात्र उद्देश्य पारदर्शिता लाना है। अगर अवैध प्रवासी उनके मतदाता हैं, तो उन्हें चिंता होनी चाहिए। यदि टीएमसी ने गलत मतदाता बनाए हैं, तो यह बहुत गंभीर मुद्दा है। जिन लोगों की मृत्यु हो गई है, अगर वे भी मतदान कर रहे हैं, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।"
उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष की आलोचना की और कहा, "भारत का निर्वाचन आयोग विश्व का सबसे बड़ा स्वायत्त संस्थान है। इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एसआईआर आवश्यक है।"
भाजपा सांसद ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "भारत एक बड़ी ताकत बनने जा रहा है। यह एक उभरता हुआ देश है, जिसकी अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। भारत को किसी की डिक्टेशन की आवश्यकता नहीं है। हम समान व्यापार करते हैं। हम स्वतंत्र हैं, न कि किसी के बंधुआ मज़दूर।"
खटाना ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज होने और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "देश के खिलाफ सोचना या नारे लगाना कानून का उल्लंघन है, जिसमें कठोर सजाओं का प्रावधान है। यह किसी भी देश में होता है।"