अदाणी पावर और ड्रुक ग्रीन पावर करेंगी भूटान में 770 मेगावाट की चामखरछू-1 जलविद्युत परियोजना स्थापित
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी पावर लिमिटेड और भूटान की सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) ने 6 अक्टूबर 2026 को भूटान के झेमगांग जिले में 770 मेगावाट की चामखरछू-1 जलविद्युत परियोजना स्थापित करने की औपचारिक घोषणा की। यह दोनों कंपनियों के बीच दूसरी बड़ी जलविद्युत साझेदारी है, जो मई 2025 में हुए 5,000 मेगावाट के समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।
परियोजना की संरचना और शर्तें
यह परियोजना बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (BOOT) मॉडल के तहत विकसित की जाएगी। इसमें अदाणी पावर की 49% और DGPC की 51% इक्विटी भागीदारी होगी। रियायत अवधि 30 वर्ष की होगी, जिसकी गणना वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से की जाएगी। परियोजना मध्य भूटान की चामखरछू नदी पर स्थित है और निर्माण कार्य 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है।
कंपनी के अनुसार, परियोजना के COD (वाणिज्यिक संचालन तारीख) से छह वर्षों के भीतर पूर्ण रूप से चालू हो जाने का लक्ष्य है।
पिछली साझेदारी से संबंध
यह घोषणा सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना समझौते के बाद आई है। गौरतलब है कि यह दोनों परियोजनाएँ उसी व्यापक MoU का हिस्सा हैं, जिसके तहत अदाणी समूह और DGPC भूटान में कुल 5,000 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता विकसित करने पर सहमत हुए थे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है, और क्षेत्रीय हरित ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में जलविद्युत को केंद्रीय भूमिका दी जा रही है।
हस्ताक्षर समारोह और प्रमुख उपस्थिति
हस्ताक्षर समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री ल्योंचेन दाशो शेरिंग टोबगे ने शिरकत की। इस अवसर पर वित्त मंत्री, ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री, ड्रुक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (DHI), भूटान पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPC), DGPC बोर्ड, DGPC प्रबंधन और अदाणी पावर के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
अदाणी पावर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने कहा, 'हम चामखरछू जलविद्युत परियोजना के माध्यम से भूटान की सरकार और DGPC के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए बेहद प्रसन्न हैं। दक्षिण एशिया के ऊर्जा बदलाव को तेज करने में जलविद्युत की अहम भूमिका होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना से भूटान की सर्दियों में बिजली की अधिकतम माँग पूरी होगी और गर्मियों में अतिरिक्त हरित बिजली भारत को निर्यात की जा सकेगी।
DGPC के प्रबंध निदेशक दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा, 'यह साझेदारी भूटान के जलविद्युत विकास की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भूटान तथा भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करती है।' रिनजिन ने भारत को स्वच्छ ऊर्जा निर्यात के अवसरों को भी रेखांकित किया।
क्षेत्रीय और पर्यावरणीय महत्व
यह परियोजना भूटान की स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने में सहायक होगी। यह भारत-भूटान द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों की एक और कड़ी है, जो दोनों देशों की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।