क्या भूटान के साथ स्थिरता और विश्वास पर आधारित साझेदारी को और मजबूत करेंगे गौतम अदाणी?
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नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने रविवार को कहा कि वह भूटान के साथ अपनी साझेदारी को और भी मजबूत बनाएंगे। यह साझेदारी पर्यावरण संरक्षण, आपसी विश्वास और दीर्घकालिक लाभ पर आधारित है। उन्होंने हिमालयी देश भूटान के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग की सराहना की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उद्योगपति गौतम अदाणी ने कहा कि भूटान आना मेरे लिए हमेशा सुखद अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (जीएमसी) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहना मेरे लिए गर्व की बात है। यह भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक की दूरदर्शिता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण है।
गौतम अदाणी ने कहा कि ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए भूटान में 5,000 मेगावाट जलविद्युत परियोजनाओं के लिए एक समझौता (एमओयू) किया गया है। इसके अलावा 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना की औपचारिक शुरुआत भी हुई है।
उन्होंने इस अवसर पर भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे की उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। गौतम अदाणी ने कहा कि वे भूटान के साथ इस साझेदारी को आगे भी मजबूत करते रहेंगे, जो पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालिक लाभदायक है।
पिछले साल मई में अदाणी ग्रुप ने भूटान में मिलकर 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने की घोषणा की थी। इस समझौते पर भूटान की सरकारी कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (डीजीपीसी) और अदाणी ग्रीन हाइड्रो लिमिटेड के अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए थे।
इस परियोजना में डीजीपीसी की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदाणी ग्रुप की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। यह साझेदारी पहले से चल रही वांगछू जलविद्युत परियोजना पर आधारित है।
सितंबर में अदाणी पावर और डीजीपीसी ने मिलकर 570 मेगावाट की वांगचू जलविद्युत परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण शेयरधारक समझौते (एसएचए) पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर भूटान के प्रधानमंत्री और गौतम अदाणी उपस्थित थे।
इस दौरान बिजली खरीद समझौते (पीपीए) पर सैद्धांतिक सहमति पर भी हस्ताक्षर किए गए और डेवलपर्स ने भूटान की शाही सरकार के साथ परियोजना के लिए रियायत समझौते (सीए) पर भी दस्तखत किए।
वांगछू परियोजना में नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत संयंत्र और संबंधित बुनियादी ढांचे की स्थापना में लगभग 60 अरब रुपए का निवेश किया जाएगा। इससे भूटान में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा।