प्रधानमंत्री मोदी ने आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं को किया याद, बताया मार्गदर्शक
सारांश
Key Takeaways
- आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत की नींव रखी।
- उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी ने शंकराचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की।
- शंकराचार्य का योगदान भारतीय संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण है।
- उनकी शिक्षाएं सत्य और करुणा पर जोर देती हैं।
नई दिल्ली, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आदि गुरु शंकराचार्य जयंती के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अमूल्य योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य भारत के प्रख्यात आध्यात्मिक गुरुओं में से एक थे, जिनके ज्ञान और शिक्षाएं हमें सत्य, करुणा और सामूहिक कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, "आदि गुरु शंकराचार्य की गहन शिक्षाएं, विचार और अद्वैत वेदांत का दर्शन विश्वभर में अनगिनत लोगों को मार्गदर्शन दे रहा है। उन्होंने समन्वय, अनुशासन और सभी अस्तित्व की एकता पर बल दिया। आध्यात्मिक विचारों को पुनर्जीवित करने और पूरे देश में आध्यात्मिक केंद्र स्थापित करने की उनकी कोशिशें सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।"
उन्होंने आगे कहा, "आदि गुरु शंकराचार्य का ज्ञान और उनकी शिक्षाएं हमारे मार्ग को निरंतर आलोकित करती रहें और सत्य, करुणा तथा सामूहिक कल्याण के प्रति हमारे संकल्प को मजबूत करें।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी इस अवसर पर शंकराचार्य को नमन करते हुए उनकी शिक्षाओं को याद किया। उन्होंने लिखा, "अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक, सांस्कृतिक एकता के सूत्रधार, महान दार्शनिक एवं रचनाकार, जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने भारत के चारों दिशाओं में पवित्र मठों की स्थापना कर सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया। उनका संपूर्ण जीवन लोक कल्याण और सत्य के लिए समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा।"
इसी मौके पर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आदि गुरु शंकराचार्य को याद किया। उन्होंने लिखा, "महान आध्यात्मिक गुरु और दार्शनिक, जगद्गुरु श्री आदि शंकराचार्य को उनकी जयंती पर मेरा प्रणाम!"