क्या एम्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में सुविधाओं की स्थिति रिपोर्ट दाखिल की है और अंसारी नगर में 3000 बेड वाला विश्राम सदन बनेगा?
सारांश
Key Takeaways
- 3000 बेड का विश्राम सदन अंसारी नगर में बनेगा।
- फुटपाथ पर सोने वाले मरीजों के परिजनों की समस्याएं सामने आईं।
- रात की शटल सेवा का समय बढ़ा दिया गया है।
- शेल्टर सुविधाओं की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
- करुणामय सेवा एम्स की प्राथमिकता है।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए फुटपाथ पर सोने को विवश मरीजों के परिजनों और ठंड से होने वाली परेशानियों पर अपने विचार साझा किए हैं।
रिपोर्ट में एम्स ने यह स्पष्ट किया कि यह एक मरीज-केंद्रित संस्थान है और मरीजों तथा उनके परिजनों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह जागरूक है।
अदालत को जानकारी देते हुए एम्स ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। इस दिशा में, एम्स ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड को लगभग 80 शेल्टर स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराई है। वर्तमान में, तीन शेल्टर होम संचालित हैं, जिनमें कुल 949 बेड की व्यवस्था की गई है। इन शेल्टर होम की क्षमता को बढ़ाने के लिए डबल बेड भी लगाए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को ठहरने की सुविधा मिल सके।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मरीजों की सुविधा के लिए रात में शटल सेवा के समय को बढ़ा दिया गया है। अब यह सेवा रात 3 बजे तक उपलब्ध है और सुबह 5 बजे से फिर से शुरू होती है। मरीजों और उनके परिजनों की सहायता के लिए एक विशेष सहायता टीम का गठन किया गया है, जिसमें सुरक्षाकर्मी और शेल्टर होम के प्रबंधक शामिल हैं।
सुविधाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एम्स ने एक अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इसके तहत बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर घोषणाएं करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, बेड की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए एक रियल टाइम डैशबोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
लंबी अवधि की मानवीय योजना के तहत, एम्स ने अंसारी नगर में 3000 बेड वाला एक विशाल विश्राम सदन बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह नया विश्राम सदन पुराने 300 बेड वाले भवन की जगह बनेगा और इसे एक प्रतिष्ठित गैरलाभकारी संस्था के सहयोग से विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए साइट सर्वे और वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू की जा चुकी हैं।
एम्स ने दोहराया कि करुणामय सेवा उसकी सार्वजनिक जिम्मेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और संस्थान यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी मरीज या उसका तीमारदार असहाय न छोड़ा जाए।