2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या भारत और यूके के संसदीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या भारत और यूके के संसदीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई?

सारांश

भारत और यूके के उपराष्ट्रपति के बीच हुई चर्चा ने संसदीय संबंधों को नई दिशा दी। जानिए इस महत्वपूर्ण वार्ता के प्रमुख बिंदु।

मुख्य बातें

भारत और यूके के बीच संसदीय संबंधों को मजबूत बनाना आवश्यक है।
डिजिटल नवाचार से संसदीय कार्यों में सुधार संभव है।
महिला राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
कॉमनवेल्थ देशों के साथ सहयोग का अवसर है।
संसदीय कूटनीति का महत्व बढ़ रहा है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में स्थित संसद भवन में यूनाइटेड किंगडम के सदन के अध्यक्ष लॉर्ड मैकफॉल ऑफ अलक्लुइथ पीसी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह चर्चा 14 से 16 जनवरी तक भारत में आयोजित राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) के दौरान हुई।

उपराष्ट्रपति ने यूके के संसद के सदन के अध्यक्ष का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति भारत और यूके के बीच मित्रता और मजबूत संसदीय संबंधों का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह दौरा उत्पादक और आनंददायक रहेगा, जिससे दोनों देशों की संसदीय परंपराओं, संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों की गहरी समझ प्राप्त होगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों की संसदें कानून का शासन, संसदीय विशेषाधिकार और कार्यपालिका पर प्रभावी लोकतांत्रिक निगरानी के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने भारत में जिम्मेदारी के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व भी बताया और चेतावनी दी कि इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

उन्होंने संसदीय कूटनीति के महत्व पर जोर दिया और कॉमनवेल्थ में संसदीय संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि भारत ने कई अंतर-संवैधानिक प्रतिनिधिमंडलों की मेज़बानी की है, और यह चर्चा करना लाभकारी होगा कि संयुक्त कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ज्ञान साझा करने की पहलों को कैसे लागू किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने डिजिटल नवाचार पर भी चर्चा की और बताया कि दुनिया भर में संसदों के कामकाज में डिजिटल तकनीक का प्रभाव बढ़ा है। भारत में भी ई-पार्लियामेंट सिस्टम, लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड्स को लागू किया गया है। उन्होंने हाउस ऑफ लॉर्ड्स के डिजिटल अनुभवों में रुचि व्यक्त की, विशेषकर पारदर्शिता बढ़ाने, जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने और संसदीय कार्यों को सरल बनाने के लिए।

उपराष्ट्रपति ने कॉमनवेल्थ को संसदीय विचारों के आदान-प्रदान और लोकतांत्रिक मानकों को बनाए रखने का एक अद्वितीय मंच बताया। उन्होंने कहा कि अध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि संसदीय लोकतंत्र सभी वर्गों के लिए प्रभावी ढंग से कार्य करता रहे।

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और यूके मिलकर महिला राजनीतिक भागीदारी, जलवायु सुदृढ़ता, शिक्षा में सहयोग, और तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाने जैसे वैश्विक मुद्दों पर संसदीय और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग कर सकते हैं।

-राष्ट्र प्रेस

एएमटी/एबीएम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और यूके के संसदीय संबंधों का महत्व क्या है?
भारत और यूके के संसदीय संबंधों का महत्व दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करना और संसदीय कूटनीति को बढ़ावा देना है।
इस वार्ता में कौन-कौन से मुद्दे उठाए गए?
इस वार्ता में महिला राजनीतिक भागीदारी, जलवायु सुदृढ़ता, और डिजिटल नवाचार जैसे मुद्दे उठाए गए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले