क्या स्टार्टअप इंडिया जैसी सरकारी योजनाएं छोटे शहरों के उद्यमियों को सशक्त बना रही हैं?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या स्टार्टअप इंडिया जैसी सरकारी योजनाएं छोटे शहरों के उद्यमियों को सशक्त बना रही हैं?

सारांश

क्या स्टार्टअप इंडिया जैसी सरकारी योजनाएं छोटे शहरों के उद्यमियों को सशक्त बना रही हैं? इस लेख में जानिए कैसे विभिन्न सरकारी पहलों ने उन्हें समर्थन दिया है।

मुख्य बातें

भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि हुई है।
सरकारी योजनाएं उद्यमिता को सशक्त बना रही हैं।
युवाओं के लिए नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्टार्टअप संस्थापकों ने स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल पूरे होने की खुशी में आयोजित कार्यक्रम में छोटे शहरों और कस्बों के व्यापारियों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से उद्यमियों की भूमि रहा है और सरकारी योजनाएं उन्हें समर्थन देने के लिए एक उचित ढांचा तैयार करने में मदद कर रही हैं।

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज हम स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइलस्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं। यह यात्रा केवल एक सरकारी योजना की सफलता नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के सपनों की यात्रा है।"

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया मिशन में योगदान देने वाले युवाओं की सराहना करते हुए कहा, "हमारे यंग इनोवेटर्स, जिन्होंने नए सपने देखने का साहस दिखाया, मैं उन सभी की सराहना करता हूं।"

मिस्टईओ के सह-संस्थापक और सीईओ सैमुअल जॉन ने कहा कि भारत हमेशा से उद्यमियों की भूमि रहा है, और ये पहलें उन्हें समर्थन देने के लिए एक उचित ढांचा तैयार करने में मदद कर रही हैं।

मिस्टईओ के सीटीओ कमांडर (सेवानिवृत्त) सुधीश टीएम ने राष्ट्र प्रेस को बताया, “प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर और अपनी क्षमताओं, अपने उत्पादों की क्षमता और समाज के साथ-साथ सरकारी तंत्र पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में उन्हें समझाने के लिए मैं बहुत उत्साहित था।”

उन्होंने आगे कहा, "मैं स्टार्टअप इंडिया मिशन का आभारी हूं जिसने इसे संभव बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी परियोजनाओं और उत्पादों के बारे में हमारी व्याख्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और प्रश्न भी पूछे। यह वास्तव में एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव था।"

एयरोबे की सीईओ और सह-संस्थापक नेहा चौहान के अनुसार, 'स्टार्टअप इंडिया नेशनल स्टार्टअप अवार्ड' प्राप्त करना किसी भी उद्यमी के लिए सपने के सच होने जैसा है।

उन्होंने कहा, “हम इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, और मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया फंड योजना हो या निधि प्रयास योजना, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एक अद्भुत पहल की है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत महज दस वर्षों में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में 500 से भी कम थी, जो आज बढ़कर दो लाख से अधिक हो गई है। वहीं, यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर लगभग 125 हो गई है। भारतीय स्टार्टअप्स लगातार आईपीओ लॉन्च कर रहे हैं, रोजगार सृजित कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

फ्यूजलेज इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और एमडी देविका चंद्रशेखरन ने बताया कि जब हमने कंपनी शुरू की थी, तब हमारी टीम में सिर्फ दो सदस्य थे। यह स्टार्टअप कृषि क्षेत्र की गंभीर चुनौतियों का समाधान कर रहा है।

चंद्रशेखरन ने कहा, “हमारे क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद हमें स्टार्टअप का आईडिया आया, जिसने हमें किसानों के लिए समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। हमने फसल क्षति और पौध उपचार विधियों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए दो ड्रोन बनाए हैं।”

हाइफन एससीएस के सह-संस्थापक और सीईओ अरुण पंडित के अनुसार, यह उनके लिए गर्व का क्षण है। हमने भारत और विदेश में कई पुरस्कार जीते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान प्राप्त करना बहुत भावुक करने वाला है। हमें बेहद गर्व है और हमारी टीम भारत के नवाचारों को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टार्टअप इंडिया का उद्देश्य क्या है?
स्टार्टअप इंडिया का उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को समर्थन देकर उन्हें सशक्त बनाना है।
क्या स्टार्टअप इंडिया ने छोटे शहरों में प्रभाव डाला है?
जी हाँ, स्टार्टअप इंडिया ने छोटे शहरों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया है और नए व्यवसायों को स्थापित करने में मदद की है।
क्या स्टार्टअप इंडिया ने युवाओं को अवसर प्रदान किए हैं?
बिल्कुल, स्टार्टअप इंडिया ने युवाओं को नए विचारों के साथ आगे बढ़ने और अपने व्यवसाय स्थापित करने के अवसर प्रदान किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले