क्या अखिलेश यादव ने पूजा पाल पर पलटवार किया? सीएम से मुलाकात के बाद किस बात का डर?

सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए।
- किसान खाद के लिए परेशान हैं, सरकार मूक है।
- दिव्यांगों के हक के लिए सपा की योजनाएं हैं।
- शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में छात्रों का आंदोलन जारी है।
- चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
लखनऊ, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधायक पूजा पाल के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उन्होंने सीएम से मुलाकात कर ली है, तो फिर किस बात का डर है? उनके प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली सरकार को पत्र लिख रहे हैं, जिसमें यह मांग की जा रही है कि ऐसे संगठनों की जांच की जाए।
सपा प्रमुख ने कहा कि पूरे यूपी में किसान खाद के लिए दिनभर लाइन में खड़े हैं, लेकिन सरकार खामोश है। कई जगहों पर बुजुर्ग किसानों की जान चली गई है। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि खाद कहां है। कई क्षेत्रों में जंगली जानवर बच्चे और किसानों को निशाना बना रहे हैं। बिजनौर, कालागढ़, नवाबगंज और खीरी में लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं। यह सरकार झूठ बोलती है। सुनने में आया है कि स्कूलों के मर्ज होने पर जिन लोगों ने अपने बच्चों को पीडीए पाठशाला में भेजा है, सरकार उन पर भी एफआईआर दर्ज कराने की योजना बना रही है।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग डीएम के पीछे और डीएम चुनाव आयोग के पीछे छिपे हुए हैं। चुनाव आयोग को 18,000 एफिडेविट सौंपे गए थे, जिनमें से केवल 14 का ही जवाब आया है।
सपा प्रमुख ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री को पता था कि एक दिन ऐसा विधेयक आएगा। इसी कारण मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने पहले अपने ऊपर से मुकदमे वापस लिए और डिप्टी सीएम के ऊपर से भी मुकदमा वापस ले लिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि वे 'वोटर अधिकार यात्रा' में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग कोई भी गलत काम करें, कोई कार्रवाई नहीं होगी। समाजवादी सरकार बनने पर दिव्यांगों को उनका हक मिलेगा। हमारी सरकार दिव्यांगों को इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर देने के साथ ही ग्राम पंचायत और शहर में दुकानों का आवंटन करेगी। सरकार ने दिव्यांगों से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन कोई भी वादा पूरा नहीं हो पाया। योजनाएं बनी भी तो उन तक नहीं पहुंच पाईं, जिससे उन्हें हर दिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें हॉस्टल से बाहर निकाला जा रहा है और खाना सही तरीके से नहीं मिल रहा है।