संविधान की रक्षा: अखिलेश यादव का संकल्प और राजनीतिक दृष्टिकोण
सारांश
Key Takeaways
- संविधान की रक्षा करना हमारा संकल्प है।
- भाजपा ने संविधान बदलने की कोशिश की है।
- सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रहेगी।
- बाबा साहब का संविधान सिर्फ कागज नहीं, बल्कि लोहे की तलवार है।
- प्रदेश की जनता अब भाजपा के छल और षड्यंत्र को समझ चुकी है।
लखनऊ, १४ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतरत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा करने का हमारा दृढ़ संकल्प है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि बाबा साहब ने हजारों वर्षों के शोषण के खिलाफ सामाजिक न्याय की जो लड़ाई लड़ी, वह आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी लोग सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए निरंतर संघर्ष करते रहेंगे, चाहे इसमें वर्षों लगें या सदियाँ। अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने 400 सीटें जीतने पर संविधान बदलने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश की जनता ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भाजपा के खिलाफ मतदान किया, जिससे संविधान सुरक्षित रह सका। उनका कहना था कि बाबा साहब का संविधान केवल कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि लोहे की तलवार है। यह हमें सुरक्षा देता है, न्याय दिलाता है और बराबरी का अवसर प्रदान करता है।
अखिलेश यादव ने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा सरकार के दौरान कई स्थानों पर बाबा साहब की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के ५० जिलों में ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भाजपा जनता को भ्रमित करने के लिए विभिन्न घोषणाएं और बजट का सहारा लेती है, लेकिन प्रदेश की जनता अब उनके 'छल और षड्यंत्र' को समझ चुकी है और उनके बहकावे में नहीं आएगी।
-- राष्ट्र प्रेस
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