क्या एसआईआर पर अखिलेश यादव का बयान तथ्यहीन है? : मंत्री जयवीर सिंह

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क्या एसआईआर पर अखिलेश यादव का बयान तथ्यहीन है? : मंत्री जयवीर सिंह

सारांश

उत्तर प्रदेश के मंत्री जयवीर सिंह ने अखिलेश यादव के एसआईआर पर बयान को आधारहीन बताया। उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से भरा कहा है। जानें क्या हैं उनके तर्क और एसआईआर की प्रक्रिया में समाजवादी पार्टी की भूमिका।

मुख्य बातें

एसआईआर की प्रक्रिया पर अखिलेश यादव का बयान विवादास्पद है।
जयवीर सिंह ने इसे तथ्यहीन और राजनीतिक दुर्भावना से भरा बताया।
कानून व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

लखनऊ, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बयान को तथ्यहीन करार दिया।

उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि एसआईआर पर अखिलेश यादव का बयान पूरी तरह से आधारहीन है, जिसमें किसी भी प्रकार की सत्यता नहीं है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वे राजनीतिक दुर्भावना से ग्रसित होकर इस तरह के बयान दे रहे हैं। इन बयानों का सत्यता से कोई सरोकार नहीं है।

मंत्री जयवीर सिंह ने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया को संपन्न कराने की दिशा में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता जिस तरह का अथक परिश्रम कर रहे हैं, वो सराहनीय है। हम सभी ने देखा है कि किस तरह से एसआईआर की प्रक्रिया को सफल कराने की दिशा में सपा कार्यकर्ताओं ने जमीन पर उतरकर परिश्रम किया। ऐसी स्थिति में अगर अखिलेश यादव एसआईआर के संबंध में किसी भी प्रकार का भ्रामक बयान देते हैं, तो इससे साफ जाहिर होता है कि वो इस पूरे मामले में दोहरा रवैया अपना रहे हैं।

इसके अलावा, उन्होंने केजीएमयू में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस मामले में संलिप्त आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज चलता है। कानून-व्यवस्था का पालन करने की दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने ‘विकसित भारत जी राम जी’ को श्रमिकों के लिए जरूरी बताया और कहा कि ये बदलाव श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, जिनके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। मनरेगा कानून में श्रमिकों को मिलने वाले फायदे को विस्तारित किया गया है। हमने इसमें बदलाव करते हुए श्रमिकों को मिलने वाले रोजगार के दिनों में भी बढ़ोतरी की है। साथ ही, यह सुनिश्चित किया है कि जिन श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पाता, उन्हें गुजारा भत्ता प्रदान किया जाए, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की आर्थिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़े। इस सबको देखते हुए 'जी राम जी' को काफी हितकारी माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में हमारी पार्टी के नेता धरातल पर उतरकर लोगों को जी राम जी से होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि श्रमिकों के हितों पर किसी भी प्रकार की आंच नहीं आए। हमारी पार्टी के नेता जमीन पर उतरकर श्रमिकों को बता रहे हैं कि केंद्र सरकार ने जी राम जी योजना से किस तरह उन्हें फायदा पहुंचाने की कोशिश की है। आगामी दिनों में कितने बड़े पैमाने पर उन्हें इस योजना से लाभ पहुंच सकता है। लेकिन, यह दुर्भाग्य की बात है कि विपक्ष के लोग इसे समझने की कोशिश नहीं कर पा रहे हैं। वो राजनीतिक दुर्भावना से ग्रसित होकर लगातार इसका विरोध कर रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें समाज में हो रहे राजनीतिक संवाद के महत्व को समझना चाहिए। यह आवश्यक है कि हम सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं। अखिलेश यादव और जयवीर सिंह के बीच की इस बहस से हमें यह समझने का मौका मिलता है कि राजनीति में तथ्य और भावना कैसे intertwined होते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव का बयान किस संदर्भ में था?
अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कुछ गंभीर आरोप लगाए थे, जिन्हें मंत्री जयवीर सिंह ने तथ्यहीन बताया है।
जयवीर सिंह का क्या कहना है?
जयवीर सिंह ने अखिलेश यादव के बयान को राजनीतिक दुर्भावना से भरा हुआ बताया है।
राष्ट्र प्रेस