दिल्ली हाईकोर्ट से अलका लांबा को मिली राहत, एफआईआर पर पुलिस को दिया नोटिस
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पुलिस से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह जानना आवश्यक बताया कि एफआईआर किस परिस्थिति में दर्ज हुई और अब तक जांच की प्रगति क्या है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जल्द से जल्द अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, अलका लांबा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में उल्लेख किया गया है कि उनके खिलाफ मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि वह सभी पक्षों को सुनने के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल नोटिस जारी कर पुलिस से जवाब मांगा जा रहा है।
इससे पहले, राउज एवेन्यू कोर्ट ने अलका लांबा के खिलाफ मार्च २०२४ में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित हमले की शिकायत पर आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किया था। कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने कहा था कि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार के दिसंबर २०२५ के आदेश में कोई अवैधता या त्रुटि नहीं थी।
मजिस्ट्रेट ने १९ दिसंबर २०२५ को लांबा के खिलाफ लोक सेवकों पर हमला करने, सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने और वैध आदेश की अवज्ञा करने के लिए आरोप तय किए। २०२४ के लोकसभा चुनाव से पहले, अलका लांबा और अन्य ने संसद में महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने कहा कि जंतर-मंतर रोड के आसपास निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद प्रदर्शन आयोजित किया गया। वहीं, अधिकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दी थी।