क्या अमित मालवीय को मिली बड़ी राहत? सनातन धर्म विवाद में तमिलनाडु पुलिस का मामला हाई कोर्ट से खारिज

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क्या अमित मालवीय को मिली बड़ी राहत? सनातन धर्म विवाद में तमिलनाडु पुलिस का मामला हाई कोर्ट से खारिज

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय ने भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह मामला उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के विवादित बयानों से जुड़ा था। क्या यह निर्णय राजनीतिक बयानबाजी और कानून के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा? जानें इस मामले की पूरी कहानी!

Key Takeaways

  • मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय अमित मालवीय के पक्ष में आया।
  • उदयनिधि स्टालिन के बयानों को लेकर विवाद बढ़ा।
  • कानून के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने मंगलवार को तिरुचि शहर पुलिस द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ 2023 में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।

यह एफआईआर तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनीधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप में दर्ज की गई थी। न्यायमूर्ति एस. श्रीमाथी ने कहा कि उदयनिधि के बयान घृणास्पद भाषण की श्रेणी में आते हैं।

जस्टिस श्रीमाथी ने यह भी कहा कि अमित मालवीय ने केवल मंत्री द्वारा दिए गए भाषण पर प्रतिक्रिया दी थी और ऐसी प्रतिक्रिया के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

न्यायाधीश ने बताया कि जिस पार्टी से उदयनिधि संबंधित हैं, उसने बार-बार सनातन धर्म के खिलाफ बयान दिए हैं, इसलिए सभी परिस्थितियों पर विचार करना आवश्यक है।

जस्टिस ने कहा, “यह स्पष्ट है कि द्रविड़ कज़गम (डीके) और उसके बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) द्वारा पिछले 100 वर्षों से हिंदू धर्म पर हमले किए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने मंत्री के भाषण के छिपे अर्थ पर सवाल उठाया है।”

डीएमके-वकील विंग, त्रिची दक्षिण के जिला आयोजक केएवी थिनकरन की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद अमित मालवीय के खिलाफ आईपीसी, 1860 की धारा 153, 153ए और 505(1)(बी) के तहत दंडनीय अपराध का मामला दर्ज किया गया। अमित मालवीय ने इस एफआईआर को रद्द करने के लिए अदालत का रुख किया था।

शिकायत में यह भी कहा गया था कि अमित मालवीय ने उपमुख्यमंत्री के भाषण को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया और फर्जी समाचार फैलाए, मानो स्टालिन ने 80 प्रतिशत बहुसंख्यक आबादी के नरसंहार का आह्वान किया हो।

शिकायत में यह भी तर्क दिया गया कि मालवीय ने विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता पैदा की और देश के सामाजिक ताने-बाने को भंग करने के लिए हिंदी में भी पोस्ट साझा किए थे। मालवीय की पोस्ट के बाद अयोध्या के संत परमहंस आचार्य ने मंत्री का सिर कलम करने के लिए 10 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया था। इसलिए, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि मालवीय की पोस्ट भी घृणास्पद भाषण की श्रेणी में आती है।

इसके बाद, अमित मालवीय ने हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में एक याचिका दायर कर त्रिची पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज किए गए केस को रद्द करने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद, जस्टिस ने आदेश दिया कि अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज केस को रद्द किया जाए।

Point of View

यह स्पष्ट है कि इस मामले में कानून और राजनीति का जटिल संबंध है। अदालत का निर्णय यह दिखाता है कि कैसे राजनीतिक बयानबाजी कभी-कभी कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। हमें यह समझना होगा कि इस तरह के मामलों में न्याय की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है।
NationPress
21/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या यह मामला महत्वपूर्ण है?
हाँ, यह मामला राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कानून के दुरुपयोग और राजनीतिक बयानबाजी के बीच के संबंध को उजागर करता है।
अमित मालवीय के खिलाफ क्या आरोप थे?
उन्हें उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया गया था।
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