केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कांग्रेस पर लगाया परिसीमन से जनता को वंचित करने का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह परिसीमन से जनता को वंचित कर रही है।
- जनगणना 2021 में कोविड महामारी के कारण नहीं हो पाई।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के आरक्षण का प्रावधान है।
- जाति जनगणना 2024 में होगी।
- दक्षिण और उत्तर के राज्यों के अधिकार बराबर हैं।
नई दिल्ली, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' और 'परिसीमन' पर हो रही चर्चा का उत्तर दिया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कई सदस्यों ने यह सवाल उठाया कि परिसीमन अभी क्यों लाया जा रहा है? मैं यह स्पष्ट कर दूँ कि जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विचार किया गया है, उसमें उल्लेख है कि २०२६ के बाद होने वाली जनगणना के उपरांत जो परिसीमन होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछ रहे हैं कि बिल लाते समय इसका उल्लेख क्यों किया गया? यह हमने नहीं किया। १९७१ में इंदिरा गांधी की सरकार ने इसे फ्रीज किया था। जब वह फ्रीज की गई सीटों की संख्या को उठाते हैं, तब नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कार्यान्वयन होता है, इसलिए हम इसे लेकर आए हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि सबसे पहले १९७२ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को ५२५ से बढ़ाकर ५४५ किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया गया। १९७६ में सत्ता की रक्षा के लिए आपातकाल के दौरान ४२वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी गई। तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने कानून बनाकर परिसीमन पर रोक लगाई। लेकिन आज विपक्ष में बैठकर परिसीमन पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे हैं। तब भी कांग्रेस ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित किया था और आज भी यही कर रही है।
उन्होंने कहा कि १९७६ में इस देश की जनसंख्या ५६.७९ करोड़ थी, और आज १४० करोड़ है। ५६.७९ करोड़ की जनसंख्या के लिए जितने सांसद थे, उतने ही १४० करोड़ की जनसंख्या में भी रहना चाहिए, यह विपक्ष का मानना है। कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई। सभी को पता है कि २०२१ में जनगणना होनी थी और उसी वर्ष कोविड महामारी का संकट आया, जिसके कारण जनगणना संभव नहीं हो पाई। कोविड संकट समाप्त होने के बाद देश को इससे उबरने में काफी समय लगा। जब २०२४ में जनगणना की शुरुआत हुई, तब कुछ दलों ने उचित मांग की कि जाति के आधार पर जनगणना की जानी चाहिए। सरकार ने अनेक दलों, जाति समूहों, राज्य सरकारों और कई सामाजिक समूहों के साथ चर्चा की और निर्णय लिया कि हम जाति जनगणना कराएंगे और अब जनगणना हो रही है।
गृह मंत्री ने कहा कि मैं १४० करोड़ जनता को स्पष्ट करना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का जो निर्णय लिया है, वह २०२६ की जनगणना को जाति के साथ कराने का निर्णय है। हम जो संविधान लेकर शपथ लेते हैं, वह उत्तर-दक्षिण का भेद नहीं कराता। यह हम नहीं होने देंगे।
उन्होंने कहा कि कहा जा रहा है कि दक्षिण के साथ अन्याय होगा, लेकिन दक्षिण बनाम उत्तर का नैरेटिव नहीं होना चाहिए। मैं स्पष्ट कर देता हूँ कि दक्षिण के राज्यों का इस सदन में उतना ही अधिकार है, जितना उत्तर के राज्यों का है। इस देश को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव से अलग नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब से यह बिल आया है, तब से विपक्ष ने भ्रांतियां फैलानी शुरू कर दी हैं कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार संविधान संशोधन लेकर आई है। मैं बताना चाहता हूँ कि तीन माह पहले ही हम जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुके हैं। अब इसे टालने का कोई सवाल ही नहीं है। जाति जनगणना शुरू हो चुकी है, और उसका पहला चरण चल रहा है।