अमित शाह ने सदन में राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल, आंकड़े पेश किए
सारांश
Key Takeaways
- अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला
- सदन में राहुल की उपस्थिति 51 प्रतिशत
- कांग्रेस के महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस में भाग न लेना
- विदेश यात्रा के समय सदन का सत्र होना
- विपक्ष का स्पीकर पर पक्षपाती रवैया होने का आरोप
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कांग्रेस और विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने राहुल की 'गंभीरता' और उन दावों की 'सच्चाई' पर सवाल उठाए, जिनमें वह बार-बार कहते हैं कि सदन में उनकी आवाज दबी रहती है।
गृह मंत्री शाह ने कई उदाहरण प्रस्तुत किए, जब कांग्रेस के इस प्रमुख नेता की भूमिका पर सवाल उठे। इसका मुख्य कारण उनके लगातार विदेश दौरे और महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे भूमि अधिग्रहण विधेयक पर चर्चा में भाग न लेना था।
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता का दावा है कि उन्हें सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी जाती, लेकिन असल में, वह खुद बोलना नहीं चाहते।
केसी वेणुगोपाल द्वारा उठाए गए इस सवाल का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता को कई बार रोका, उन्होंने पूछा, "जब कोई नेता ध्यान नहीं देता, तो आपके अनुसार स्पीकर को क्या करना चाहिए?"
शाह ने बताया कि 17वीं लोकसभा में राहुल गांधी की उपस्थिति 51 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 67 प्रतिशत था। वहीं, 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत था।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि 15वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 43 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 76 प्रतिशत था।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सांसद ने कई महत्वपूर्ण चर्चाओं में हिस्सा नहीं लिया, जैसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, बजट चर्चा, और अन्य आवश्यक बिलों पर।
अमित शाह ने राहुल पर विदेश यात्राओं को लेकर भी तीखा हमला किया और कहा कि कांग्रेस सांसद तब विदेश जाते हैं जब सदन का सत्र चल रहा होता है।
उन्होंने कहा कि संसद के सत्र के दौरान वह विदेश यात्रा की योजना बनाते हैं। वह विदेश से यहां कैसे बोल सकते हैं? वीडियो कॉन्फ्रेंस का कोई प्रावधान नहीं है।
वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने गृह मंत्री शाह द्वारा सदन में राहुल की अनुपस्थिति पर बार-बार चर्चा करने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यह बहस स्पीकर के 'पक्षपातपूर्ण' रवैये पर है, न कि राहुल के आचरण पर। उन्होंने इस मामले में आसन से हस्तक्षेप की मांग की।