बेंगलुरु पब विवाद: आंध्र प्रदेश के IAS अधिकारी विकास मरमत का तत्काल तबादला, CM नायडू ने दिए थे आदेश
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश सरकार ने IAS अधिकारी विकास मरमत को 15 अक्टूबर 2026 को तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया। यह कार्रवाई 10 अक्टूबर की रात बेंगलुरु के रेजिडेंसी रोड स्थित एक पब में ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और बहस के बाद की गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कथित तौर पर तबादले का आदेश दिया।
मुख्य घटनाक्रम
10 अक्टूबर की रात करीब 1:30 बजे बेंगलुरु के रेजिडेंसी रोड पर स्थित एक पब में पुलिस टीम बार और रेस्तरां की नियमित चेकिंग कर रही थी। इस दौरान पुलिस ने ग्राहकों से उम्र की पुष्टि के लिए पहचान पत्र माँगे। आरोप है कि मरमत और उनके तीन साथियों ने पुलिसकर्मियों के साथ बहस की, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के साथ मारपीट की अथवा उन्हें धमकी दी।
पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके की शिकायत पर कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में मरमत और तीन अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अन्य आरोपियों की पहचान अभय उदय सिंह, नितेश और रोशन के रूप में की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, 2019 बैच के IAS अधिकारी मरमत को कुप्पम एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (KADA) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पद से हटाकर अगली पोस्टिंग तक जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।
मुख्य सचिव ने चित्तूर जिले के कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि KADA के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पद के लिए तत्काल 'इन-चार्ज' व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कथित तौर पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने स्वयं इस घटना की जानकारी मिलने के बाद तबादले का आदेश दिया था।
पुलिस का आरोप पत्र
शिकायत के अनुसार, आरोपी समूह ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि पुलिस इंस्पेक्टर सालुंके और उनके साथियों को शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने की कोशिश की और उन्हें ड्यूटी से रोका। यह घटना ऐसे समय में हुई जब पुलिस देर रात उत्पात रोकने के लिए नियमित छापेमारी अभियान चला रही थी।
गौरतलब है कि बेंगलुरु में देर रात पब और बार की नियमित चेकिंग कर्नाटक पुलिस की एक स्थापित प्रक्रिया है, जिसमें नाबालिगों की पहचान और शराब नीति के अनुपालन की जाँच होती है।
आम जनता पर असर
यह घटना सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के प्रति प्रशासन की गंभीरता को रेखांकित करती है। एक IAS अधिकारी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई दुर्लभ मानी जाती है और इसने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।
आलोचकों का कहना है कि यह घटना दर्शाती है कि सत्ता के पदों पर बैठे अधिकारी कभी-कभी कानून को लेकर विशेषाधिकार का भाव रखते हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि सरकार का त्वरित कदम यह संदेश देता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
क्या होगा आगे
मरमत अब GAD में अपनी अगली पोस्टिंग का इंतजार करेंगे, जबकि कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की जाँच जारी रहने की संभावना है। कर्नाटक पुलिस और आंध्र प्रदेश सरकार दोनों की ओर से इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई पर नज़र रखी जाएगी।