आंध्र प्रदेश की सहायक आयुक्त को अवैध संपत्ति मामले में भेजा गया पुलिस हिरासत में

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आंध्र प्रदेश की सहायक आयुक्त को अवैध संपत्ति मामले में भेजा गया पुलिस हिरासत में

सारांश

विजयवाड़ा में एक स्थानीय अदालत ने एंडोमेंट्स विभाग की सहायक आयुक्त को अवैध संपत्ति मामले में दो दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। क्या यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है?

Key Takeaways

  • आंध्र प्रदेश की सहायक आयुक्त को अवैध संपत्ति मामले में गिरफ्तार किया गया।
  • एसीबी ने 1.37 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता लगाया।
  • तलाशी के दौरान कई संपत्तियाँ और दस्तावेज़ जब्त किए गए।
  • अदालत ने 15 और 16 अप्रैल को पूछताछ की अनुमति दी है।
  • मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विजयवाड़ा, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एक स्थानीय अदालत ने एंडोमेंट्स विभाग की एक निलंबित सहायक आयुक्त को अवैध संपत्ति के मामले में दो दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की अदालत ने कलिंगिरी शांति से १५ और १६ अप्रैल को पूछताछ करने की अनुमति दी है।

शांति को ७ अप्रैल को उनके संबंधित ठिकानों पर एक साथ की गई छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। वह वर्तमान में विजयवाड़ा जिला जेल में हैं। उन्होंने अपने ढाई साल के बेटे से मिलने के लिए एक याचिका दायर की थी। अदालत ने इस मामले पर निर्णय के लिए १६ अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

७ अप्रैल को हुई छापेमारी के दौरान, एसीबी को जानकारी मिली कि उन्होंने १.३७ करोड़ रुपए की संपत्ति जमा की थी, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक थी। अधिकारियों ने ताडेपल्ली, उंडावल्ली और विशाखापत्तनम सहित विभिन्न स्थानों पर १० घंटे तक जांच की।

उन्होंने कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ जब्त किए और अनेक संपत्तियों का पता लगाया, जिनमें विशाखापत्तनम में एक आवासीय फ्लैट, कुंचनपल्ली में एक जी+२ भवन, ७७६ ग्राम सोने के गहने, लगभग ३ किलोग्राम चांदी की वस्तुएं, १.१५ लाख रुपए नकद, बैंक खातों में लगभग ३ लाख रुपए, एक कार, एक मोटरसाइकिल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट शामिल हैं।

तलाशी के बाद, एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सहायक आयुक्त के खिलाफ 'आय से अधिक संपत्ति' का मामला दर्ज किया। उसी दिन एसीबी अदालत ने उन्हें २१ अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

गिरफ्तारी के बाद, सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। यह पिछले दो वर्षों में दूसरी बार है जब शांति को निलंबित किया गया है।

उन्हें २०२० में आंध्र प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से बंदोबस्ती विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया था, और उन्होंने विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा में कार्य किया।

२०२४ में टीडीपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद अनियमितताओं के आरोपों के चलते शांति को निलंबित किया गया था। वह जुलाई २०२४ से मार्च २०२६ तक निलंबित रहीं। पिछले महीने उनका निलंबन हटा दिया गया था, और वह अपनी नई पोस्टिंग का इंतज़ार कर रही थीं।

Point of View

यह मामला हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब सरकारी अधिकारी इस तरह के आरोपों का सामना करते हैं, तो यह संकेत देता है कि प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। हमें ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

कलिंगिरी शांति को कब गिरफ्तार किया गया था?
कलिंगिरी शांति को 7 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था।
एसीबी ने किस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया?
एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
क्या शांति को अपने बेटे से मिलने की अनुमति मिली?
शांति ने अपने बेटे से मिलने की अनुमति की याचिका दायर की थी, जिस पर अदालत 16 अप्रैल को निर्णय लेगी।
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