क्या आंध्र प्रदेश में पी-4 कार्यक्रम से आर्थिक असमानताएं कम होंगी?
सारांश
Key Takeaways
- पी-4 कार्यक्रम आर्थिक असमानताओं को कम करने का प्रयास है।
- सरकार सुरक्षित पेयजल और आवास की सुविधा प्रदान करेगी।
- संजीवनी स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू किया जाएगा।
- कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा पर ध्यान दिया जाएगा।
- कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
अमरावती, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य सरकार ने गरीबों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने और वित्तीय विकास में सहायता देने के लिए पी-4 कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके माध्यम से आर्थिक असमानताओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का उद्देश्य गरीबों के उत्थान और सभी को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध रहना है, ताकि एक सुखद, स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके। यह बयान उन्होंने अपने पैतृक गांव नरवरिपल्ले में संक्रांति समारोह के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।
मुख्यमंत्री ने त्योहारों को मिलकर मनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा, "इस मिलन समारोह से सभी को अपार खुशी मिलेगी।"
उन्होंने संक्रांति और कनुमा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि तिरुपति को विवाह समारोहों के लिए एक प्रमुख स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, साथ ही मंदिर नगरी के सभी तालाबों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम और अमरावती को मेगा सिटी के रूप में विकसित करने की योजना है।
सरकार ने 2027 तक भूमि सर्वेक्षण पूरा करने और सरकारी मुहर एवं क्यूआर कोड वाली पट्टादार पासबुक वितरित करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि संजीवनी स्वास्थ्य कार्यक्रम को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा, जो पहले कुप्पम में सफलतापूर्वक लागू किया गया था। इसका उद्देश्य सभी संवेदनशील लोगों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड रखना है, उसके बाद छात्रों और आम जनता के रिकॉर्ड बनाए जाएंगे।
सीएम ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र के एकीकृत विकास के लिए पिछले वर्ष स्वर्ण नरवरिपल्ले परियोजना शुरू की थी, जिसमें रंगमपेटा, कंदुलावरिपल्ले और चिन्नारामपुरम पंचायतों में पायलट परियोजना शुरू की गई है।
इस विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सभी घरों में सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति, जल निकासी व्यवस्था और आवास कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
उन्होंने कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा उत्पादन पर विशेष ध्यान देने की बात कही। साथ ही, प्राकृतिक खेती के लिए जियो टैगिंग और प्रमाणीकरण की सुविधाएं भी दी जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कौशल विकास को प्राथमिकता देने की बात भी कही और क्षेत्र में कार्यस्थल स्थापित करने का आश्वासन दिया, ताकि युवा अपने गांवों में काम कर सकें।