क्या एंकल मूवमेंट से जोड़ों की अकड़न दूर कर बैलेंस सुधारा जा सकता है?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। घर या कार्यस्थल पर कुर्सी पर लंबे समय तक एक ही पोज में बैठने या अनियमित दिनचर्या के कारण पीठ, कमर, कंधों और टखनों में जकड़न और दर्द एक सामान्य समस्या बन गई है। नियमित छोटी-छोटी व्यायाम से शरीर की लचीलापन और रक्त संचार में सुधार संभव है। टखनों की सरल मूवमेंट (एंकल मूवमेंट) एक प्रभावी और आसान व्यायाम है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए इस व्यायाम को केवल 3-5 मिनट में किया जा सकता है। यह टखनों और पैरों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, जकड़न को कम करता है और संपूर्ण शरीर का बैलेंस सुधारता है। इसे घर या ऑफिस में कुर्सी पर बैठे-बैठे भी आसानी से किया जा सकता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, टखनों की सरल गतिविधियाँ कुछ ही मिनटों में लचीलापन बढ़ाती हैं, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती हैं और जोड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक होती हैं। ये आसान तकनीक विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए अधिक लाभकारी हैं जो लंबे समय तक बैठे या खड़े रहते हैं।
टखनों की ये गतिविधियाँ जकड़न को कम करती हैं, पैरों के जोड़ों को सही करती हैं और संपूर्ण शरीर का बैलेंस सुधारती हैं। नियमित अभ्यास से टखनों की रेंज ऑफ मोशन में वृद्धि होती है, जिससे चलने-फिरने में आसानी होती है, गिरने का जोखिम कम होता है और रोजमर्रा के कार्यों में सुविधा मिलती है।
एंकल मूवमेंट की तकनीक भी सरल है। इस व्यायाम को खड़े होकर आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए दोनों पैरों को एक साथ जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं। शरीर को संतुलित रखें और हाथों को कमर पर या किनारे पर रखें। दाएं पैर को थोड़ा आगे की ओर खींचें और जमीन से लगभग 9 इंच (लगभग 22-25 सेमी) ऊपर उठाएं। पैर को हल्के से ऊपर-नीचे (पॉइंट और फ्लेक्स) करें, फिर दाएं-बाएं घुमाएं। उसके बाद पैर को गोल-गोल घुमाएं। पहले घड़ी की दिशा में फिर घड़ी के विपरीत दिशा में 5-10 बार करें। इस दौरान गति धीमी और नियंत्रित रखें।
यह अभ्यास केवल 3-5 मिनट में पूरा हो जाता है। इसे सुबह उठने के बाद या दिन के किसी भी समय किया जा सकता है। यदि संतुलन में समस्या हो तो दीवार या कुर्सी का सहारा लें। इससे टखनों और पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। रक्त प्रवाह में सुधार से पैरों में थकान और सूजन कम होती है। जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है, जिससे घुटनों और कूल्हों पर भी कम दबाव पड़ता है। बैलेंस में सुधार से बुजुर्गों में गिरने का खतरा घटता है।