अपराजिता सारंगी की मुख्यमंत्री से अपील: मेट्रो प्रोजेक्ट पर पुनर्विचार करें
सारांश
Key Takeaways
- भुवनेश्वर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट पर रोक के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील।
- शहरीकरण और ट्रैफिक जाम की समस्याएं बढ़ रही हैं।
- मेट्रो सेवा से सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलेगी।
- यह परियोजना निवेश के लिए ओडिशा को आकर्षक बनाएगी।
- 274 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।
भुवनेश्वर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को एक पत्र लिखकर भुवनेश्वर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को रोकने के अपने हालिया निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की।
पत्र में अपराजिता सारंगी ने उल्लेख किया कि भुवनेश्वर इस समय एक 'टिपिंग पॉइंट' पर पहुँच चुका है। तेजी से बढ़ती शहरीकरण, जनसंख्या में वृद्धि और बढ़ते ट्रैफिक जाम ने शहर की मौजूदा परिवहन व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाल दिया है।
उन्होंने कहा, "हमारा शहर तेजी से बदल रहा है। ट्रैफिक की समस्या बढ़ रही है और लोगों को बेहतर, टिकाऊ और आधुनिक परिवहन की आवश्यकता है। अब समय आ गया है कि हम एक मजबूत और आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का निर्माण करें।"
सारंगी ने मेट्रो रेल को एक दीर्घकालिक समाधान बताते हुए कहा कि इससे न केवल भुवनेश्वर बल्कि आस-पास के क्षेत्रों (कटक, जतनी और खुर्दा) को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि मेट्रो सेवा से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों, छात्रों, कामकाजी लोगों, व्यापारियों और दिव्यांगजनों को सुरक्षित और सरल यात्रा की सुविधा मिलेगी।
भाजपा सांसद ने चेतावनी दी कि यदि इस परियोजना को बंद किया गया तो इसका सीधा प्रभाव रोजगार, आर्थिक विकास और योजनाबद्ध शहरी विकास पर पड़ेगा। सारंगी ने लिखा, "मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकना मतलब रोजगार के नए अवसरों, आर्थिक गतिविधियों और शहर के समग्र विकास के अवसरों को खोना है। यह केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि भुवनेश्वर को एक स्मार्ट और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
अपराजिता सारंगी ने पत्र में कई महत्वपूर्ण आंकड़े और तर्क भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि भुवनेश्वर, कटक और खुर्दा की संयुक्त जनसंख्या मेट्रो परियोजना की आवश्यकता को सही ठहराती है। इसके साथ ही, मेट्रो कनेक्टिविटी से लिंगराज मंदिर, धौली और नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
भाजपा सांसद ने यह भी बताया कि यह परियोजना ओडिशा को निवेश के लिए आकर्षक और भविष्य के लिए तैयार राज्य बनाने के लक्ष्य के अनुसार है। अब तक इस पर 274 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है और यदि इसे टाला गया तो आने वाले समय में लागत दो से चार गुना तक बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश भर में मेट्रो परियोजनाएं सब्सिडी के आधार पर चलती हैं और उन्हें तुरंत मुनाफे के लिए नहीं बनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि देश के 18 शहरों में मेट्रो सेवा चालू है, 16 शहरों में निर्माण कार्य जारी है और 12 शहरों में योजना के स्तर पर कार्य चल रहा है, जिनमें कई टियर-2 शहर भी शामिल हैं।
सारंगी ने मुख्यमंत्री से 4 अप्रैल को लिए गए कैबिनेट निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार के विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने और फंडिंग में मदद दिलाने का भी विश्वास दिलाया।