क्या झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली की आत्मा से खिलवाड़ किया है: अर्जुन मुंडा?

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क्या झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली की आत्मा से खिलवाड़ किया है: अर्जुन मुंडा?

सारांश

क्या झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली की आत्मा से खिलवाड़ किया है? अर्जुन मुंडा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, इसे बड़ा धोखा करार देते हुए। जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और आदिवासी समाज पर इसके प्रभाव का विश्लेषण।

Key Takeaways

  • पेसा नियमावली का उद्देश्य आदिवासी स्वशासन को सुनिश्चित करना है।
  • अर्जुन मुंडा ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' करार दिया है।
  • राज्य सरकार को पेसा एक्ट की मूल भावना का सम्मान करना चाहिए।
  • ग्राम सभा की परिभाषा को कमजोर किया गया है।
  • जनजाति समाज की पहचान को खतरा है।

रांची, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र) नियमावली पर भाजपा ने तीखा हमला किया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि हेमंत सरकार ने पेसा एक्ट की मूल भावना पर कुठाराघात किया है। उन्होंने इसे एक्ट का 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' बताते हुए इसे बड़ी धोखाधड़ी कहा।

अर्जुन मुंडा ने कहा कि झारखंड में पेसा नियमावली लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसे लेकर कई नागरिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और सरकार पर दबाव बनाया। लंबे विचार-विमर्श के बाद सरकार ने नियमावली को कैबिनेट से पारित किया, लेकिन यह न तो दुरुस्त है और न ही पेसा एक्ट, 1996 की मूल भावना के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी जनजाति समाज का स्वशासन उसकी पारंपरिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है, जो सदियों से चला आ रहा है। केंद्र सरकार ने पेसा एक्ट, 1996 इसी भावना को संरक्षित करने के लिए बनाया था। राज्य सरकार को नियमावली बनाने का अधिकार है, लेकिन एक्ट की मूल भावना से छेड़छाड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है।

अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार द्वारा घोषित पेसा नियमावली में ग्राम सभा की परिभाषा को जानबूझकर कमजोर और अस्पष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी नियमावली की प्रस्तावना उसकी आत्मा होती है, जो उसके विस्तारित स्वरूप को स्पष्ट करती है, लेकिन झारखंड सरकार की नियमावली में ग्राम सभा की परिभाषा को पेसा एक्ट, 1996 से अलग कर दिया गया है और उसे छुपाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने बताया कि एक्ट में ग्राम सभा को रूढ़िजन्य विधि, धार्मिक प्रथाओं और परंपराओं के आधार पर परिभाषित किया गया है, जो सदियों से चली आ रही हैं, जबकि राज्य सरकार की नियमावली में न तो ग्राम सभा की स्पष्ट परिभाषा है और न ही 'परंपरा' की व्याख्या की गई है। देश के अन्य नौ राज्यों में जहां पेसा एक्ट लागू है, वहां ग्राम सभा को एक्ट के अनुरूप परिभाषित किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी कानून की मूल भावना को समाप्त कर दिया जाएगा तो उसके दूरगामी परिणाम गंभीर होंगे। सरकार द्वारा अधिसूचित यह नियमावली जनजाति समाज के साथ बड़ा धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनजाति समाज के चारित्रिक आधार को बदलने का प्रयास कर रही है और कहा कि जैसे व्यक्ति की पहचान उसके परिवार से होती है, वैसे ही जनजाति समाज की भी अपनी विशिष्ट पहचान होती है। प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा, मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक और प्रवक्ता राफिया नाज भी उपस्थित रहे।

Point of View

NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

पेसा नियमावली क्या है?
पेसा नियमावली पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र के लिए बनायी गई है, जिसका उद्देश्य आदिवासी समाज के स्वशासन को सुनिश्चित करना है।
अर्जुन मुंडा ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अर्जुन मुंडा ने आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने पेसा एक्ट की मूल भावना से खिलवाड़ किया है।
क्या पेसा नियमावली आदिवासी समाज के लिए हानिकारक है?
हां, अर्जुन मुंडा के अनुसार, यह नियमावली जनजाति समाज के साथ बड़ा धोखा है।
पेसा एक्ट कब लागू हुआ था?
पेसा एक्ट, 1996 में लागू किया गया था।
क्या अन्य राज्यों में भी पेसा एक्ट लागू है?
हां, देश के अन्य नौ राज्यों में भी पेसा एक्ट लागू है।
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