आर्टेमिस II: एस्ट्रोनॉट्स ने स्पेस में नया रिकॉर्ड स्थापित किया
सारांश
Key Takeaways
- आर्टेमिस II मिशन ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया।
- चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद का चक्कर लगाया।
- 54 साल पुराना अपोलो रिकॉर्ड तोड़ा गया।
- मिशन ने महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया।
- भविष्य के आर्टेमिस मिशनों के लिए संकेतक।
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नासा का ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। आर्टेमिस II के चारों अंतरिक्ष यात्री अब स्पेस में किसी भी मानव द्वारा सबसे अधिक दूरी तय कर चुके हैं। उन्होंने अपोलो मिशन के 54 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। 55 वर्षों के बाद, इंसानों ने फिर से चांद की परिक्रमा की है।
यह उपलब्धि न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार मानव फिर से चांद की कक्षा में सफल हुए हैं।
नासा ने एक्स पर लाइव कवरेज के दौरान इस सफलता की जानकारी दी। मिशन कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हान्सन ने आर्टेमिस II कैप्सूल ‘ओरियन’ में सवार होकर यह उपलब्धि प्राप्त की। यह मिशन 1 अप्रैल को लॉन्च हुआ था और भारतीय समय के अनुसार 6-7 अप्रैल की रात इस महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया गया।
चांद से लगभग 2 लाख 52 हजार 756 मील दूर, चांद की दूसरी तरफ पहुँचकर इन चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान, जब ओरियन कैप्सूल चांद के पीछे पहुंचा, तब भारतीय समय के अनुसार सुबह 4 बजकर 14 मिनट तक यानी लगभग 40 मिनट तक पृथ्वी से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया था। चांद ने रेडियो और लेजर सिग्नल को अवरुद्ध कर दिया, जिससे चारों यात्री अकेले रह गए थे। संपर्क पुनः स्थापित होने के बाद, नासा मिशन कंट्रोल ने आर्टेमिस II से फिर से जुड़ाव किया।
इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की कई नई तस्वीरें लीं और महत्वपूर्ण डेटा एकत्र किया, जो भविष्य के आर्टेमिस मिशनों और चांद पर मानव लैंडिंग के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। जब ओरियन कैप्सूल चांद के पीछे से गुजरा, तब अंतरिक्ष यात्रियों ने 'पूर्ण सूर्य ग्रहण' का अद्भुत दृश्य देखा। उन्होंने चांद को ज्यादातर अंधेरे में देखा और इस अवसर का उपयोग सौर कोरोना का अध्ययन करने के लिए किया जाएगा।
आर्टेमिस II मिशन नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2020 के दशक के अंत तक चांद पर फिर से इंसानों को उतारना है। इस मिशन की सफलता को नासा ने “मजबूत कंधों के साथ आगे बढ़ें” की मिसाल बताया है।
चांद पर दुनियाभर के कई देशों के अंतरिक्ष यात्री उतर चुके हैं, लेकिन आर्टेमिस II मिशन के तहत अब मानव पहली बार चांद के उस हिस्से को देख रहा है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था। इस मिशन में नासा का ओरियन स्पेसक्राफ्ट चांद की काफी गहराई तक भेजा गया है।