क्या अरुणाचल में सेना ने बस दुर्घटना के बाद 13 लोगों को बचाया?

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क्या अरुणाचल में सेना ने बस दुर्घटना के बाद 13 लोगों को बचाया?

सारांश

गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में एक बस दुर्घटना ने 13 नागरिकों की जान को संकट में डाल दिया, लेकिन भारतीय सेना के गजराज कोर के बहादुर जवानों ने तत्परता से बचाव कार्य किया। क्या भारतीय सेना की यह बहादुरी हमें प्रेरित करती है?

Key Takeaways

गजराज कोर ने अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया। बचाव कार्य में तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। स्थानीय लोगों और सेना का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। भूस्खलन में दो श्रमिकों की मृत्यु हुई। सेना की तत्परता ने जीवन बचाने में मदद की।

ईटानगर, 2 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय सेना की गजराज कोर के सैनिकों ने अद्वितीय साहस और कुशलता का प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में एक बस दुर्घटना के बाद 13 नागरिकों को सुरक्षित निकाला। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि सेना के जवानों ने तवांग जिले में बैसाखी के पास हुई इस दुर्घटना में त्वरित प्रतिक्रिया दी। इस बस में 13 लोग सवार थे जो घाटी में गिर गई थी। सैनिकों ने बहादुरी और तत्परता के साथ बचाव कार्य शुरू किया और 'स्वयं से पहले सेवा' के सिद्धांत का पालन करते हुए सभी को सुरक्षित निकाला।

लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि सेना के जवानों ने现场 पर तत्काल चिकित्सा सहायता भी प्रदान की, जिससे घायलों की देखभाल और स्थिरीकरण में मदद मिली।

रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि गजराज कोर द्वारा प्रदर्शित व्यावसायिकता, समर्पण और निस्वार्थ सेवा वास्तव में नायकों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो हमेशा सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।

इस बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तिरप जिले में हुए एक भूस्खलन के दौरान असम राइफल्स और स्थानीय लोगों की त्वरित और साहसी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिया। इस भूस्खलन में दो श्रमिकों की मृत्यु हो गई और तीन अन्य घायल हुए।

आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि बुधवार को तिरप जिले के लापनान गाँव में एक निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में दो श्रमिकों की मौत हुई और तीन घायल हुए।

अधिकारी ने बताया कि मिट्टी काटने के दौरान हुए इस भूस्खलन में पांच श्रमिक मलबे में दब गए। असम राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के जवानों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से बचाव अभियान चलाया।

अधिकारी ने आगे कहा कि लोंगडिंग जिले के कामहुआ नोकसा गाँव के पंगकाई संकिओम (25) और जाओंग पांसा (18) नामक मजदूरों की मिट्टी के विशाल ढेर के नीचे दबने से मौत हो गई।

Point of View

हमारी सेना की पहचान है। ऐसे समय में, जब हम संकट का सामना कर रहे हैं, हमें अपने नायकों पर गर्व होना चाहिए।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

अरुणाचल में बस दुर्घटना कब हुई?
बस दुर्घटना 2 अक्टूबर को हुई थी।
कितने लोगों को भारतीय सेना ने बचाया?
भारतीय सेना ने 13 नागरिकों को सुरक्षित बचाया।
क्या सेना ने घायलों की मदद की?
हाँ, सेना ने मौके पर ही महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता प्रदान की।
भूस्खलन में कितने श्रमिक प्रभावित हुए?
भूस्खलन में दो श्रमिकों की मृत्यु हुई और तीन घायल हुए।
सेना की प्रतिक्रिया कैसे थी?
सेना ने त्वरित और साहसी प्रतिक्रिया दिखाई।
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