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बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर तीखा हमला, असम चुनाव प्रचार पर हेमंत सोरेन की टिप्पणी

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बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर तीखा हमला, असम चुनाव प्रचार पर हेमंत सोरेन की टिप्पणी

सारांश

झारखंड के विपक्षी नेता बाबूलाल मरांडी ने असम चुनावों में कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ कांग्रेस की बेतुकी बयानबाजी की आलोचना की और हेमंत सोरेन के प्रचार पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर बेतुकी बयानबाजी का आरोप लगाया।
असम में चल रहे चुनावों का राजनीतिक माहौल गरमाया।
झारखंड सीएम का असम में प्रचार करना सवाल उठाता है।
हेमंत सोरेन ने लोकतंत्र की आवाज पर दबाव की बात की।
9 अप्रैल को चुनावी रणनीतियों का असर देखने को मिलेगा।

रांची, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के विपक्षी नेता बाबूलाल मरांडी ने असम में चल रहे चुनावों और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर मुस्लिम बहुल देशों के दो पासपोर्ट होने के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पार्टी बिना किसी ठोस आधार के बातें करती है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि असम सीएम और उनकी पत्नी पर कांग्रेस के द्वारा लगाए गए आरोपों के पीछे की वजह यही है कि कांग्रेस को यह मालूम है कि असम में चुनाव हारने की कगार पर है। जब कोई चुनाव हारता है तो वह बेतुकी बयानबाजी करने लगता है और माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करता है।

झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा असम में चुनाव प्रचार करने पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उनके पास झारखंड में करने के लिए कोई काम नहीं है। वे केवल पर्यटक की तरह घूमते रहते हैं। जब पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था, तब झारखंड के मुख्यमंत्री लंदन में थे। असम में पूरा मंत्रिमंडल वहाँ डेरा डाले हुए है।

उन्होंने बताया कि वह करीब 18 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन इन सीटों से सरकार नहीं बना पाएंगे। मुझे लगता है कि वह चुनाव जीतने नहीं, बल्कि चाय बागान खरीदने गए हैं। संभव है कि वे वहाँ निवेश करने का इरादा लेकर गए हों।

झारखंड में उन्हें बहुमत की सरकार मिली हुई है, जबकि आदिवासियों की स्थिति यह है कि बीमार होने पर एम्बुलेंस नहीं मिलते हैं। गोड्डा में एक महिला ने टेम्पो में बच्चे को जन्म दिया। चाईबासा, संथाल परगना सहित अन्य क्षेत्रों की स्थिति बहुत खराब है। जहाँ से खुद मुख्यमंत्री विधायक हैं, वहाँ जाने का रास्ता नहीं है। उन्हें यहाँ सड़कें बनानी चाहिए, न कि असम में जाकर भाषण देने चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं। कल कल्पना को सभा करने से रोका गया, और आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा में अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया। क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर वे ऐसे षड्यंत्र से तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे?

उन्होंने आगे कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों-बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की गई है, और कितनी रोक पाएंगे? इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है। आगामी 9 अप्रैल को तीर-धनुष पर बटन दबाकर मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि हेमंत सोरेन की प्रतिक्रिया लोकतंत्र की आवाज पर दबाव को दर्शाती है। यह स्थिति चुनावी माहौल को और भी रोचक बनाती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिना ठोस आधार के बेतुकी बातें कर रही है।
हेमंत सोरेन ने असम में क्या कहा?
उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।
बाबूलाल मरांडी कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं?
वे लगभग 18 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
झारखंड सीएम का असम में प्रचार करने का क्या मतलब है?
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्हें झारखंड में काम करने की बजाय असम में प्रचार करना उचित नहीं है।
9 अप्रैल को क्या महत्वपूर्ण है?
इस दिन तीर-धनुष पर बटन दबाकर उनके समर्थक अपने संघर्ष का हिसाब देंगे।
राष्ट्र प्रेस
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