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क्या बहराइच में चांदबाबू का बाप्पा में अटूट विश्वास हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल है?

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क्या बहराइच में चांदबाबू का बाप्पा में अटूट विश्वास हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल है?

सारांश

बहराइच के चांदबाबू ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक अनोखी मिसाल प्रस्तुत की है। उनकी आस्था गणेश की पूजा में है, जबकि वह मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। जानें कैसे उनकी कला और भक्ति ने बहराइच में धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया।

मुख्य बातें

चांदबाबू हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं।
वह भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
उनकी कला धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देती है।
स्थानीय लोग उनकी भक्ति की सराहना करते हैं।
गणेश उत्सव में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।

बहराइच, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के बहराइच शहर में मूर्तिकार चांदबाबू ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक मिसाल पेश की है। मुस्लिम समुदाय के सदस्य होने के नाते, चांदबाबू केवल नमाज नहीं पढ़ते हैं, बल्कि भगवान गणेश की पूजा भी उसी श्रद्धा के साथ करते हैं।

गणेश उत्सव की शुरुआत से पहले, चांदबाबू अपनी कला के माध्यम से शहर में एकता का संदेश फैलाने में जुटे हैं।

वजीरबाग मोहल्ले में रहने वाले चांदबाबू पिछले 15 वर्षों से भगवान गणेश, मां दुर्गा और भगवान विष्णु की मूर्तियां बनाते आ रहे हैं। खास बात यह है कि वह मस्जिद के ठीक बाहर अपने काम को अंजाम देते हैं। उनकी कला की प्रशंसा करने के लिए आसपास के लोग खड़े होते हैं।

उनकी बनाई गणेश प्रतिमाएं न केवल बहराइच, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों में भी स्थापित की जाती हैं। स्थानीय लोग चांदबाबू की इस अनूठी भक्ति की प्रशंसा करते हैं। चांदबाबू का यह प्रयास बहराइच में धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक बन गया है।

गणेश विसर्जन के जुलूस में भी चांदबाबू श्रद्धा के साथ हिस्सा लेते हैं और बाप्पा की मूर्ति को विसर्जित करते हैं।

चांदबाबू ने कहा, “मैं मुसलमान हूं, लेकिन मेरी आस्था भगवान गणेश में अडिग है। मेरे परिवार और आस-पास के लोगों ने कभी इसका विरोध नहीं किया। सभी मेरे काम का सम्मान करते हैं।”

गणेश उत्सव के दौरान मूर्तियों को अंतिम रूप देने का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह केवल मूर्ति बनाना नहीं है, बल्कि यह मेरी आस्था और कला का प्रदर्शन है। हम सभी से भाईचारे की अपील करते हैं।”

संपादकीय दृष्टिकोण

चांदबाबू का प्रयास न केवल हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है, बल्कि यह हमारे समाज में सहिष्णुता और भाईचारे का प्रतीक भी है। ऐसे प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए जो धार्मिक विभाजन को समाप्त करते हैं और मानवता को एकजुट करते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदबाबू की कला का महत्व क्या है?
उनकी कला हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है और यह धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देती है।
क्या चांदबाबू गणेश उत्सव में भाग लेते हैं?
हाँ, चांदबाबू गणेश उत्सव में भाग लेते हैं और विधि-विधान के साथ पूजा में शामिल होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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