क्या भाजपा बंगाल में टीएमसी के गढ़ को भेद पाएगी? जयनगर क्षेत्र की विधानसभा सीटों का विश्लेषण
सारांश
Key Takeaways
- टीएमसी का जयनगर क्षेत्र में मजबूत दबदबा है।
- भाजपा को चुनौती देने के लिए ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
- विकास और रोजगार मुख्य मुद्दे हैं।
- आगामी चुनाव में संभावित बदलाव की उम्मीद है।
- सभी राजनीतिक पार्टियाँ तैयार हैं।
कोलकाता, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ी से चल रही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में राज्य का दौरा किया और चुनावी स्थिति का आकलन किया। सभी राजनीतिक पार्टियाँ चुनावी रण में कूदने के लिए तैयार हैं। इस बार एक कठिन लड़ाई देखने को मिल सकती है।
जयनगर संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से केवल एक सामान्य है, बाकी सभी आरक्षित हैं। इस क्षेत्र में वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम है। जयनगर में टीएमसी की ग्रामीण मतदाताओं और अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर मुस्लिम और अनुसूचित जाति (एससी) वोटर्स पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। आइए हम जयनगर संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली सात विधानसभा सीटों की स्थिति को विस्तार से समझते हैं।
गोसाबा: जयनगर संसदीय क्षेत्र की गोसाबा विधानसभा सीट एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। यहाँ पर टीएमसी का लंबे समय से वर्चस्व है। वर्ष २०११ से टीएमसी ने लगातार जीत हासिल की है। वर्ष २०११ में जयंता नास्कर ने जीत दर्ज की थी। इससे पहले (२००६, २००१ में) आरएसपी का कब्जा था, लेकिन २०११ के बाद टीएमसी ने यहाँ अपनी पकड़ मजबूत कर ली। २०२१ विधानसभा चुनाव में टीएमसी के जयंता नास्कर ने भाजपा के बरुण प्रमाणिक को हराया था। जयंता को १,०५,७२३ वोट मिले थे, जबकि बरुण को ८२,०१४ वोट मिले थे। इस क्षेत्र में विकास, बाढ़ सुरक्षा, मत्स्य पालन सुविधाएँ, और रोजगार मुख्य मुद्दे हैं।
बसंती: जयनगर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत बसंती विधानसभा सीट भी आरक्षित है और यहाँ टीएमसी की पकड़ मजबूत है। वर्ष २०१६ में टीएमसी के गोबिंदा चंद्र नस्कर ने १६,६०७ वोटों से जीत हासिल की थी। २०११ के बाद टीएमसी ने यहाँ अपनी पकड़ मजबूत कर ली। २०२१ में टीएमसी के श्यामल मंडल ने भाजपा के रमेश माझी को हराया था। श्यामल को १,११,४५३ वोट मिले, जबकि रमेश को ६०,८११ वोट मिले।
कुलतली: कुलतली विधानसभा सीट भी आरक्षित है। इस पर टीएमसी का कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं दिखता। २०१६ में सीपीआई (एम) के राम शंकर हल्दर ने जीत दर्ज की, लेकिन २०२१ में टीएमसी ने भारी बहुमत से कब्जा कर लिया। पिछले चुनाव में टीएमसी के गणेश चंद्र मंडल ने भाजपा के मिंटू हल्दर को ४७,१७७ वोटों से हराया। गणेश को १,१७,२३८ वोट मिले, जबकि मिंटू को ७०,०६१ वोट मिले।
जयनगर: जयनगर विधानसभा सीट भी आरक्षित है और यहाँ टीएमसी की मजबूत पकड़ है। यह सीट लोकसभा सीट का मुख्य हिस्सा है। २०१६ में टीएमसी के बिस्वनाथ दास ने जीत हासिल की थी। २०११ के बाद टीएमसी ने एससी और ग्रामीण मतदाताओं में मजबूत पकड़ बना ली है। पिछले चुनाव में बिस्वनाथ ने भाजपा के राबिन सरदार को ३८,६८३ मतों से हराया। बिस्वनाथ को १,०४,९५२ वोट मिले, जबकि राबिन को ६६,२६९ वोट मिले।
कैनिंग पश्चिम: कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीट भी आरक्षित है और यहाँ टीएमसी की पकड़ मजबूत है। २०१६ में टीएमसी के श्यामल मंडल ने जीत हासिल की थी। पिछले चुनाव में टीएमसी के रमेश दास परमार ने भाजपा के अर्नब रॉय को ३५,२४३ मतों से हराया। रमेश को १,११,०५९ वोट मिले, जबकि अर्नब को ७५,८१६ वोट मिले। इस क्षेत्र में विकास, बाढ़ सुरक्षा, मत्स्य पालन सुविधाएँ, रोजगार, और सुंदरबन संरक्षण मुख्य मुद्दे हैं।
कैनिंग पूर्व: कैनिंग पूर्व विधानसभा सीट सामान्य है। यहाँ भी टीएमसी की अच्छी पकड़ है। २०१६ और २०२१ के चुनाव में टीएमसी के सौकत मोल्ला ने जीत दर्ज की। पिछले चुनाव में सौकत ने आरएसएससीएमजेपी के गाजी शहाबुद्दीन सिराजी को ५३,००७ वोटों से हराया। सौकत को १,२२,३०१ वोट मिले, जबकि गाजी को ६९,२९४ वोट प्राप्त हुए।
मगराहाट पूर्व: मगराहाट पूर्व विधानसभा सीट आरक्षित है। यहाँ टीएमसी का दबदबा है। २०१६ से टीएमसी की नमिता साहा लगातार जीत रही हैं। पिछले चुनाव में नमिता ने भाजपा के चंदन कुमार नस्कर को ५४,०७९ मतों से हराया। नमिता को १,१०,९४५ वोट मिले, जबकि चंदन को ५६,८६६ वोट मिले।