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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहा अत्याचार निंदनीय नहीं है? वारिस पठान की सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग

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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहा अत्याचार निंदनीय नहीं है? वारिस पठान की सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग

सारांश

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी अत्याचारों पर वारिस पठान ने कड़ी निंदा की है और बांग्लादेश सरकार से त्वरित कार्रवाई करने की अपील की। क्या यह स्थिति और भी गंभीर हो रही है?

मुख्य बातें

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा की गई।
वारिस पठान ने बांग्लादेश सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है।

मुंबई, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर देश में राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है। इस संदर्भ में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता वारिस पठान ने बांग्लादेश सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

वारिस पठान ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "मैं बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों की कड़ी निंदा करता हूं, जिनमें मॉब लिंचिंग और हत्याओं की घटनाएं शामिल हैं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। मैं बांग्लादेश सरकार से इन घटनाओं पर ध्यान देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील करता हूं।"

उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के एक बांग्लादेशी खिलाड़ी की खरीद पर टिप्पणी करते हुए कहा, "शाहरुख खान की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों का चुनाव किया है, यह तय किया है कि किसे लिया जाए और क्यों, यह उनकी आंतरिक प्रक्रिया है, फिर भी सरकार को विचार करना चाहिए कि क्या बांग्लादेश के खिलाड़ियों को शामिल किया जाना चाहिए। पहले, भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने की अनुमति दी थी, जबकि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पहले हमारे बेगुनाह नागरिकों पर हमले किए थे।"

वारिस पठान ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नीतीश राणे के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "नीतीश राणे केवल नफरत फैलाने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कभी विकास की बात नहीं की। मैंने भाजपा में ऐसे लोगों को 'नफरती चिंटू' कहा है। अब उन्होंने मुझे बिच्छू कहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि नीतीश राणे किस रंग का बिच्छू हैं? वह संविधान की परवाह किए बिना डंक मारते हैं।"

महाराष्ट्र निकास चुनाव में प्रचार के संदर्भ में उन्होंने कहा, "चीजें बदलती हैं, जैसे आसमान का रंग। कल तक कुछ लोग उर्दू से नफरत करते थे। आज उद्धव ठाकरे की पार्टी के उम्मीदवार उर्दू को बढ़ावा दे रहे हैं, उर्दू में पंफलेट बांट रहे हैं और उर्दू भाषा का उपयोग कर रहे हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझना होगा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार किसी भी लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं। हमें एकजुट होकर इस पर विचार करना चाहिए और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों का क्या कारण है?
यह अत्याचार विभिन्न धार्मिक और राजनीतिक कारणों से हो रहे हैं, जो सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रहे हैं।
वारिस पठान ने सरकार से क्या मांग की?
उन्होंने बांग्लादेश सरकार से सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।
भारत में इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया हो रही है?
भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है, विभिन्न नेताओं ने अपनी राय व्यक्त की है।
राष्ट्र प्रेस
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