सुधांशु त्रिवेदी ने इंदिरा गांधी के शासन पर विदेशी फंडिंग के आरोपों का किया खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- सुधांशु त्रिवेदी ने इंदिरा गांधी के शासन पर गंभीर प्रश्न उठाए।
- विदेशी फंडिंग के आरोपों का कांग्रेस को जवाब देना आवश्यक है।
- पॉल मैगॉर की किताब में सीआईए की पहुंच का उल्लेख।
- कांग्रेस को कच्चातीवू द्वीप के सौंपने का निर्णय पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
- आम आदमी पार्टी के नेताओं का बरी होना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय पर एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस पर तीखा आरोप लगाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन के संबंध में कई गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी लेखकों और अभिलेखों में ऐसे उल्लेख हैं जिनका कांग्रेस को जवाब देना आवश्यक है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पॉल मैगॉर की पुस्तक ‘स्पाइंग इन साउथ एशिया’ में यह उल्लेख किया गया है कि उस समय भारत की व्यवस्था का शायद ही कोई हिस्सा सीआईए की पहुंच से बाहर रहा हो।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुस्तक में कहा गया है कि पोलित ब्यूरो ने कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन की राशि दी थी। उन्होंने कहा कि ये बातें संबंधित देशों के पूर्व अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने ‘मित्रोखिन आर्काइव्ज़’ का संदर्भ देते हुए बताया कि इसमें केजीबी के संपर्कों का उल्लेख है और यह दावा किया गया है कि वर्ष 1976 में कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन रुपए और बाद में दस लाख रुपए दिए गए थे।
उन्होंने कहा कि पचास साल पहले यह राशि बहुत बड़ी मानी जाती थी। भाजपा सांसद ने यह भी प्रश्न उठाया कि इन पुस्तकों में दर्ज किए गए सीधे दावों पर कांग्रेस ने अब तक कोई स्पष्ट उत्तर क्यों नहीं दिया है।
इसके अलावा, उन्होंने कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपने और 1971 के युद्ध के बाद की परिस्थितियों का उल्लेख किया। त्रिवेदी ने कहा कि 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई और 54 भारतीय सैनिकों की वापसी न होने जैसे मुद्दों पर भी देश को जवाब चाहिए कि उस समय किन आधारों पर निर्णय लिए गए थे।
दिल्ली की एक अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कथित आबकारी नीति मामले में बरी किए जाने पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी। त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई सबूत नहीं था, तो अदालत ने आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी? उन्होंने इसे तकनीकी विषय बताते हुए कहा कि अदालत के विस्तृत फैसले को पढ़ने के बाद पार्टी संरचित प्रतिक्रिया देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि करीब 100 सिम कार्ड और मोबाइल फोन नष्ट होने की बात सामने आई है, जिससे साक्ष्यों की कमी हो सकती है। त्रिवेदी ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा और पार्टी निर्णय का विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपना पक्ष रखेगी।