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बारामती उपचुनाव में आकाश मोरे की शर्त ने सियासी हलचल को बढ़ावा दिया

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बारामती उपचुनाव में आकाश मोरे की शर्त ने सियासी हलचल को बढ़ावा दिया

सारांश

बारामती विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार आकाश मोरे ने एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है, जिससे राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। उनकी मांग कि एफआईआर दर्ज की जाए, ने सभी को चौंका दिया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

आकाश मोरे की शर्त ने चुनावी माहौल में हलचल मचाई है।
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारकर स्थिति को बदल दिया है।
महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।
एफआईआर की मांग ने राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है।
आगामी चुनावों में सभी की नजरें इस मुद्दे पर रहेंगी।

पुणे, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बारामती विधानसभा उपचुनाव ने एक नया मोड़ लिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच का सामने आना बहुत जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, "हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।"

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता ने 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मृत्यु को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, "बारामती और महाराष्ट्र के 'कर्तापुरुष' चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं की गई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।"

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह से उचित है। उन्होंने कहा, "अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बारामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।"

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की ओर से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।"

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामांकन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाता है कि राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आकाश मोरे ने अपनी शर्त क्यों रखी?
आकाश मोरे ने कहा कि वे अपना नामांकन तभी वापस लेंगे जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी।
कांग्रेस के अन्य नेताओं का इस पर क्या कहना है?
कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने मोरे की शर्त को उचित बताया है।
क्या यह चुनाव निर्विरोध हो सकता है?
आकाश मोरे के मैदान में आने से निर्विरोध चुनाव की संभावना समाप्त हो गई है।
आकाश मोरे का राजनीतिक अनुभव क्या है?
आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनके पिता ने 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
इस मामले में अगली कार्रवाई क्या हो सकती है?
अब सबकी नजर महायुति सरकार पर है कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है।
राष्ट्र प्रेस
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