बरगी डैम क्रूज हादसा: पायलट महेश पटेल बोले — 'खराब मौसम की कोई चेतावनी नहीं मिली, 13 शव बरामद'
सारांश
Key Takeaways
जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे में अब तक 13 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। क्रूज पायलट महेश पटेल ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में उस दिन का आँखों देखा हाल सुनाया और भावुक होते हुए कहा कि उन्हें मौसम के बिगड़ने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। क्रूज में कुल करीब 40 से 41 लोग सवार बताए जा रहे थे और रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
महेश पटेल ने बताया कि वे 30 अप्रैल को शाम 5 बजकर 16 मिनट पर क्रूज लेकर डैम में निकले थे। उन्होंने कहा, "करीब 22 मीटर आगे जाने के बाद क्रूज को लौटाने लगा, तभी मुझे लगा कि बहुत तेज़ आँधी आ रही है। इसके बाद मैंने डीजे बंद किया और लोगों को लाइफ जैकेट पहनने के लिए कहा। हमें मौसम खराब होने की सूचना पहले से नहीं थी।" पटेल के अनुसार, आँधी आने से पहले सभी यात्री सामान्य थे और बोट किनारे से मात्र 10 मिनट की दूरी पर थी।
क्रूज को बचाने की कोशिश
पटेल ने बताया कि आँधी से बचाव के लिए उनके एक सहयोगी ने क्रूज के ऊपर लगी तिरपाल काट दी। उन्होंने बोट को किनारे लगाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन किनारे से 50 से 60 मीटर दूर रहते ही क्रूज में पानी भरने लगा। पटेल ने तत्काल रिसेप्शन पर फोन कर दूसरी बोट भेजने का अनुरोध किया। किनारे से दूसरी बोट रवाना भी की गई, परंतु तब तक पानी भर जाने से क्रूज के दोनों इंजन बंद हो चुके थे।
पलटते क्रूज का खौफनाक मंजर
पटेल ने बताया, "जब क्रूज पलट रहा था, ऊपरी डेक पर बैठे लोग लाइफ जैकेट पहनकर पानी में कूद चुके थे। मैं अपनी केबिन में था — जब क्रूज पानी में गिरा तो मैंने लाइफ जैकेट पहन ली, तभी एक लहर ने मुझे कुछ दूर फेंक दिया।" उन्होंने आशंका जताई कि निचले डेक पर बैठे लोग शायद बाहर नहीं निकल सके और उनकी मौत हो गई। मिनी बोट के किनारे से पहुँचने पर सबसे पहले उन लोगों को बचाया गया जो लाइफ जैकेट पहनकर पानी में तैर रहे थे।
मौसम चेतावनी प्रणाली पर सवाल
पटेल ने स्पष्ट किया कि उन्हें और उनकी टीम को मौसम संबंधी कोई पूर्व सूचना नहीं दी जाती थी — वे खुद मौसम देखकर ही बोट डैम में ले जाने या न ले जाने का फैसला करते थे। हादसे वाले दिन मौसम "एकदम सही" दिख रहा था, इसलिए क्रूज रवाना किया गया। यह खुलासा प्रशासनिक तंत्र की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि यदि समय पर मौसम अलर्ट मिला होता, तो क्रूज को रोका जा सकता था।
रेस्क्यू ऑपरेशन और मानसिक स्थिति
हादसे के बाद से जबलपुर जिला प्रशासन पूरी ताकत के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटा है। अब तक 13 शव बरामद किए जा चुके हैं और तलाश जारी है। पायलट महेश पटेल ने बताया कि इस हादसे के बाद से वे ठीक से न खा पा रहे हैं, न सो पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "वह मंजर मुझे बार-बार दिखाई देता है, लोगों की चीखें सुनाई देती हैं। मैंने लोगों को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन बचा नहीं सका। यह हादसा जिंदगीभर याद रहेगा।" जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि हादसे के लिए कौन-कौन से कारक जिम्मेदार रहे।