श्री लाडली जी महाराज मंदिर: श्रीकृष्ण के परपोते द्वारा स्थापित, लठमार और लड्डूमार होली के लिए विश्व प्रसिद्ध
सारांश
Key Takeaways
- श्री लाडली जी महाराज मंदिर का धार्मिक महत्व है।
- यहाँ लड्डूमार और लठमार होली जैसे अनोखे उत्सव मनाए जाते हैं।
- मंदिर की स्थापना 5000 वर्ष पूर्व हुई थी।
- विशेष अवसरों पर भव्य आरती का आयोजन होता है।
- यह स्थान विश्वभर में प्रसिद्ध है।
बरसाना, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक, होली का पर्व नजदीक है। पूरे देश में 4 मार्च को रंग और गुलाल का यह उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, लेकिन होली एक ऐसा पर्व है जिसका आयोजन कई स्थानों पर पहले से ही शुरू होता है, जिसमें प्रमुखता से ब्रज की होली शामिल है, जो अपनी विशेष परंपराओं के लिए विश्वभर में मशहूर है।
ब्रज के महत्वपूर्ण स्थलों में से एक, बरसाना का 'श्री लाडली जी महाराज मंदिर' है, जहाँ लड्डूमार और लठमार होली का अद्भुत उत्सव मनाया जाता है। यह प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना में स्थित है और देवी राधा को समर्पित है। यहाँ मुख्य रूप से श्री राधारानी (लाडली जी) और भगवान श्रीकृष्ण (लाल जी) की एक साथ पूजा की जाती है, जिसके कारण इसे 'श्री लाडली जी महाराज मंदिर' के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है शहर की प्रिय पुत्री और पुत्र।
मंदिर बरसाना की प्रमुख भानुगढ़ (ब्रह्मांचल) पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जिसे 'श्री जी मंदिर' या 'राधा रानी मंदिर' भी कहा जाता है। इसे 'बरसाने का माथा' भी कहा जाता है, और इसकी ऊँचाई लगभग २५० मीटर है। यह मंदिर अपने प्रसिद्ध त्योहारों के लिए विख्यात है, जिनमें राधाष्टमी, जन्माष्टमी, लड्डूमार और लठमार होली शामिल हैं।
विशेष अवसरों पर, मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और राधा-कृष्ण को 'छप्पन भोग' अर्पित कर भव्य आरती की जाती है। इस अवसर पर यहाँ देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्तों और सैलानियों का जमावड़ा होता है, जो इस स्थान की शोभा को और बढ़ा देता है।
मान्यता है कि राधा रानी मंदिर की स्थापना लगभग 5000 वर्ष पूर्व राजा वज्रनाभ द्वारा की गई थी, जो भगवान श्रीकृष्ण के परपोते थे। इस मंदिर का माहौल हमेशा 'राधा-राधा' के जाप से गूंजता रहता है और भक्तों को मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 108 सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं।
बरसाना की लड्डूमार होली में, मंदिर के पुजारी और भक्त हवा में लड्डू फेंकते हैं, जिसे लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। वहीं, लट्ठमार होली में बरसाना की महिलाएं नंदगांव से आए पुरुषों पर लाठियों से प्रहार करती हैं, और पुरुष स्वयं को ढाल से बचाने की कोशिश करते हैं। यह परंपरा श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम-लीलाओं से प्रेरित है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ बरसाना राधा और उनकी सखियों को रंगने आते थे, तब राधा और उनकी सखियाँ उन्हें लाठियों से खदेड़ती थीं। इस परंपरा को आज तक उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो विश्वभर में प्रसिद्ध है।