18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भाजपा नेता नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया पर मदिगा समुदाय से विश्वासघात का आरोप लगाया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भाजपा नेता नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया पर मदिगा समुदाय से विश्वासघात का आरोप लगाया

सारांश

पूर्व केंद्रीय मंत्री ए नारायणस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर मदिगा समुदाय के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है। उन्होंने आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

मुख्य बातें

सिद्धारमैया पर मदिगा समुदाय के साथ विश्वासघात का आरोप आंतरिक आरक्षण की मांग का मुद्दा कर्नाटक में दलितों की स्थिति सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए आंदोलन की घोषणा

बेंगलुरु, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता ए नारायणस्वामी ने शुक्रवार को राज्य सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 35 वर्षों से आंतरिक आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे मदिगा समुदाय के साथ विश्वासघात किया है।

उन्होंने कहा कि केवल मदिगा समुदाय ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य दलित समुदायों को भी गुमराह किया गया है। उनके अनुसार, आंतरिक आरक्षण की मांग को लेकर 101 जातियों को भ्रमित किया गया और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को भी सरकार ने गलत जानकारी दी।

नारायणस्वामी ने उदाहरण दिया कि तमिलनाडु ने अनुच्छेद 9 के तहत 69 प्रतिशत आरक्षण लागू कर वंचित समुदायों को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार ने आंतरिक आरक्षण के मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी रूप से पैरवी करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।

उन्होंने सवाल उठाया कि सर्वेक्षण और आयोगों की रिपोर्ट पर सार्वजनिक धन खर्च कर किसके हित साधे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के एक वर्ष बाद भी आंतरिक आरक्षण पर चर्चा न होना सरकार की विफलता है।

नारायणस्वामी ने कहा कि न्यायमूर्ति सदाशिव, मधुस्वामी और न्यायमूर्ति नागमोहन दास की रिपोर्टों को खारिज कर सरकार ने आंतरिक आरक्षण को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा की है। विधानसभा में विधेयक पारित कर राज्यपाल को भेजा गया, लेकिन मामला अब तक लंबित है।

उन्होंने मांग की कि यदि मुख्यमंत्री, दलित मंत्री और अनुसूचित जाति आरक्षित सीटों से चुने गए 54 विधायक वास्तव में दलितों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के 54 विधायकों के होते हुए भी इस मुद्दे पर मौन रहना चिंताजनक है।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि दलित मंत्री कैबिनेट बैठकों में अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं और यदि वे बोल नहीं सकते तो मंत्री पद पर क्यों बने हुए हैं। उन्होंने आंदोलन शुरू करने की घोषणा की और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 2.8 लाख सरकारी पद रिक्त हैं और नौकरी के इच्छुक युवा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आरोप लगाया कि हाल की कैबिनेट बैठक में सरकार ने पुरानी आरक्षण प्रणाली को बहाल करने का निर्णय लेकर दलितों और आंदोलनरत युवाओं को गुमराह किया।

नारायणस्वामी ने कहा कि यदि सरकार सामाजिक न्याय के प्रति सच में प्रतिबद्ध होती, तो वह इंद्रा साहनी मामले में बताए अनुसार 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा से कानूनी रूप से आगे बढ़ सकती थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां क्रमशः 58 और 57 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है, जबकि कर्नाटक सरकार अदालत में मजबूत दलीलें पेश करने में असफल रही।

उन्होंने कहा कि मदिगा समुदाय और उसकी उपजातियां, जो दशकों से वंचित हैं, आंतरिक आरक्षण के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने पर आंतरिक आरक्षण लागू करने का वादा किया था।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर सामाजिक न्याय के पैरोकार के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। साथ ही, 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस निर्णय ने सरकारों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए आंतरिक आरक्षण और विशेष प्रावधान करने का अधिकार दिया है, जो डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की भावना के अनुरूप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि मुख्यमंत्री की स्थिति इस मामले को और जटिल बना रही है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन है ए नारायणस्वामी?
ए नारायणस्वामी पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता हैं।
मदिगा समुदाय क्या है?
मदिगा समुदाय एक वंचित जाति है जो आंतरिक आरक्षण की मांग कर रही है।
कर्नाटक में आंतरिक आरक्षण का मुद्दा क्या है?
यह मुद्दा मदिगा समुदाय और अन्य दलित जातियों के लिए आरक्षण की मांग से संबंधित है।
सिद्धारमैया पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
उन्हें मदिगा समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया गया है।
आंदोलन का क्या उद्देश्य है?
आंदोलन का उद्देश्य सामाजिक न्याय और आंतरिक आरक्षण की मांग को उचित ठहराना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले