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नारायणस्वामी की सिद्धारमैया को बहस की चुनौती: कांग्रेस सरकार पर विकास में बाधा का आरोप

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नारायणस्वामी की सिद्धारमैया को बहस की चुनौती: कांग्रेस सरकार पर विकास में बाधा का आरोप

सारांश

बागलकोट में भाजपा नेता नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया को चुनौती दी है कि वे अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय पर जवाब दें। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राज्य को विकास से वंचित कर दिया है।

मुख्य बातें

नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया को बहस के लिए चुनौती दी।
कांग्रेस सरकार पर विकास में बाधा डालने का आरोप।
अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय का मुद्दा उठाया।
राज्य सरकार की गारंटी योजनाओं पर सवाल।
कर्नाटक में आगामी चुनावों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

बागलकोट (कर्नाटक), 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने मंगलवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सार्वजनिक बहस के लिए चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि सिद्धारमैया राज्य में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय के संबंध में उनके प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देते हैं, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

भाजपा जिला कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए नारायणस्वामी ने कहा कि यदि सिद्धारमैया उचित उत्तर देने में असफल रहते हैं, तो उन्हें भी हार स्वीकार कर राजनीति से सन्यास लेना पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य को विकास से पूरी तरह वंचित कर दिया है।

नारायणस्वामी ने कहा कि पूरी दुनिया भारत की प्रशंसा कर रही है, लेकिन कांग्रेस इसे 'सरेंडर मोदी' कहती है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस नेताओं को शर्म नहीं आती?

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मजबूत और सक्षम नेता हैं, जो संकटों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकते हैं।

नारायणस्वामी ने यह भी कहा कि यदि आज कांग्रेस देश पर शासन कर रही होती, तो भारत पाकिस्तान जैसी स्थिति में होता, अस्तित्व के लिए भीख मांग रहा होता।

उन्होंने पूछा कि क्या बागलकोट और दावनगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की हार होने पर राज्य सरकार की गारंटी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी?

उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कांग्रेस नेताओं पर डराने-धमकाने की राजनीति का आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या आप सिर्फ इन दो विधानसभा क्षेत्रों में गारंटी बंद करेंगे या पूरे राज्य में?

नारायणस्वामी ने कहा कि सिद्धारमैया हार के डर और राज्य सरकार की स्थिरता को लेकर चिंताओं के साथ-साथ इस आशंका से कि हारने पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बन सकते हैं, पांच दिनों से इस क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं।

उन्होंने राज्य सरकार पर दोनों विधानसभा क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया, जिसमें मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शिक्षकों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तैनात करना शामिल है।

नारायणस्वामी ने कहा कि आश्वासनों के बावजूद, राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और पैरामेडिकल स्टाफ के वेतन में वृद्धि नहीं की है और न ही उनकी सुविधाओं में सुधार किया है, जो लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रति राज्य सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि एक तरफ घोषणाएं होती हैं, तो दूसरी तरफ शोषण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारायणस्वामी ने सिद्धारमैया को क्यों चुनौती दी?
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जातियों और अन्य वर्गों के साथ अन्याय किया है।
क्या नारायणस्वामी ने राजनीति से संन्यास लेने का वादा किया?
हाँ, यदि सिद्धारमैया उनके सवालों का संतोषजनक उत्तर देते हैं तो वे राजनीति से संन्यास लेने का वादा कर रहे हैं।
कांग्रेस सरकार पर नारायणस्वामी के आरोप क्या हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने राज्य को विकास से वंचित कर दिया है।
नारायणस्वामी ने किस मुद्दे पर सवाल उठाए?
उन्होंने गारंटी योजनाओं और अनुसूचित जातियों के साथ हो रहे अन्याय पर सवाल उठाए।
क्या यह बहस कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, यह बहस कर्नाटक में आगामी चुनावों की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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