असमानता के खिलाफ मेरी आवाज पर आरएसएस और मनुवादी कर रहे हैं मुझे निशाना: सिद्धारमैया
सारांश
Key Takeaways
- सिद्धारमैया ने असमानता के खिलाफ आवाज उठाई है।
- आरएसएस और मनुवादी ताकतें उन्हें निशाना बना रही हैं।
- कांग्रेस पार्टी हाशिए के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
- उपचुनाव में उमेश मेटी की जीत की अपील की गई।
- भाजपा और मोदी के वादों पर सवाल उठाए गए हैं।
बागलकोट, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को कहा कि असमानता के खिलाफ उनकी आवाज के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और मनुवादी ताकतें उन्हें निशाना बना रही हैं।
बागलकोट में कर्नाटक शोशित समुदायों के महासंघ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने भाजपा और आरएसएस पर कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “मैं असमानता के खिलाफ खड़ा हूं और हाशिए पर रहने वाले लोगों के साथ हूं, इसी वजह से आरएसएस और मनुवादी मुझे निशाना बना रहे हैं। वे प्रताप सिम्हा के माध्यम से मुझ पर हमले की कोशिश कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों को एकजुट करती है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी हाशिए पर रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने और सभी को आर्थिक एवं सामाजिक आजादी दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंबेडकर का सपना हर व्यक्ति को आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता दिलाना था और कांग्रेस उसी दिशा में प्रयासरत है।
सिद्धारमैया ने लोगों से कांग्रेस और भाजपा के बीच का अंतर समझने की अपील करते हुए कहा, “कांग्रेस गरीबों और वंचितों के लिए है, जबकि भाजपा कॉरपोरेट और अमीरों के लिए काम करती है।”
उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि वंचित वर्गों के लिए कर्ज और ब्याज माफी जैसे कदम उठाए गए हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार उमेश मेटी की जीत की अपील करते हुए कहा, “भाजपा को हराना जरूरी है और उमेश मेटी को जिताना चाहिए।”
इससे पहले सिद्धारमैया ने भाजपा के ‘वाइब्रेंट गुजरात’ मॉडल की आलोचना करते हुए कहा कि इससे केवल कॉरपोरेट घरानों को फायदा हुआ है और अमीर-गरीब के बीच की खाई बढ़ी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2014 में किए गए वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा, “काले धन को वापस लाने और हर खाते में 15 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।”