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क्या पंजाब से लेकर असम तक विशेष तरीके से मनाया जाता है बसंत पंचमी का त्योहार?

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क्या पंजाब से लेकर असम तक विशेष तरीके से मनाया जाता है बसंत पंचमी का त्योहार?

सारांश

बसंत पंचमी का त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अनूठे तरीके से मनाया जाता है। इस लेख में जानें कि कैसे विभिन्न राज्यों में यह पर्व मनाया जाता है और इसकी खासियत क्या है।

मुख्य बातें

बसंत पंचमी विद्या की देवी माँ सरस्वती का पर्व है।
इस दिन विशेष पूजा और हाते खोड़ी का आयोजन होता है।
पंजाब और हरियाणा में पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है।
गंगा आरती और स्नान का विशेष महत्व है।
राजस्थान और गुजरात में पतंगबाजी की परंपरा है।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मकर संक्रांति के पश्चात देशभर में बसंत पंचमी की तैयारियाँ तेज़ हो चुकी हैं। यह पर्व 23 जनवरी को भारत के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न तरीकों से मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी का उत्सव विद्या की देवी माँ सरस्वती और फाल्गुन के महीने के आगमन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, परंतु इसे मनाने का तरीका हर राज्य में अलग है।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में इस दिन माँ सरस्वती का भव्य पूजन किया जाता है। घरों, शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक पंडालों में माँ की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं तथा रातभर भक्ति गीत गाए जाते हैं।

बंगाल में इस दिन 'हाते खोड़ी' का आयोजन भी होता है। माता-पिता अपने बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाते हैं। माना जाता है कि इस दिन 'हाते खोड़ी' करने से बच्चों पर माँ सरस्वती की विशेष कृपा होती है।

पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी को पीली सरसों के लहलहाते खेतों से जोड़ा जाता है। यह दिन सरसों की फसल के पकने का संकेत देता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और पारंपरिक व्यंजन का आनंद लेते हैं। साथ ही, पतंगबाज़ी का भी आयोजन होता है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज के घाटों पर विशेष गंगा आरती का आयोजन होता है और स्नान का महत्व भी विशेष मानते हैं। बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करना फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि पवित्र नदी में स्नान से सारे पापों का नाश होता है और घर में समृद्धि का वास होता है।

राजस्थान और गुजरात में इस दिन पतंगबाज़ी के बड़े आयोजन होते हैं। लोग पीले कपड़े और पीले फूलों की माला पहनते हैं। यहाँ बसंत पंचमी को नए ऊर्जावान मौसम के रूप में देखा जाता है।

वहीं, तेलंगाना के बासर में माँ सरस्वती का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ बसंत पंचमी के दिन 'अक्षर अभ्यासम' का आयोजन होता है। इसमें बच्चों को शिक्षित करने के प्रयास से पढ़ना और लिखना सिखाया जाता है तथा विद्या से जुड़ी चीज़ों का दान भी किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

देश के विभिन्न हिस्सों में बसंत पंचमी के उत्सव का आयोजन स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी को विद्या की देवी माँ सरस्वती के सम्मान में मनाया जाता है।
इस दिन कौन से विशेष आयोजन होते हैं?
इस दिन माँ सरस्वती की पूजा, हाते खोड़ी, गंगा आरती और पतंगबाजी जैसे आयोजन होते हैं।
बसंत पंचमी पर क्या पहनना चाहिए?
इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
क्या बसंत पंचमी पर स्नान का महत्व है?
हाँ, विशेष रूप से प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में स्नान करना फलदायी माना जाता है।
बसंत पंचमी कब मनाई जाती है?
यह पर्व हर साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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