कर्नाटक भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्या मामले में विशेष अदालत का फैसला शुक्रवार को
सारांश
Key Takeaways
- सुनवाई का समापन गुरुवार को हुआ।
- निर्णय शुक्रवार को सुरक्षित रखा गया है।
- विनय कुलकर्णी को दोषी ठहराया गया है।
- सज़ा की अवधि पर चर्चा हो रही है।
- इस मामले में राजनीतिक साज़िश का आरोप है।
बेंगलुरु, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में भाजपा नेता योगेश गौड़ा के हत्याकांड के तहत सजा की अवधि (क्वांटम ऑफ सेंटेंस) पर बेंगलुरु की एमएलए/एमपी विशेष अदालत ने गुरुवार को सुनवाई का समापन किया और फैसला शुक्रवार के लिए सुरक्षित रख लिया है।
विशेष अदालत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और दोषी कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी के वकीलों ने अपनी अंतिम दलीलें प्रस्तुत कीं। इसके बाद न्यायाधीश संतोष गजानन भट्ट ने निर्णय सुनाने के लिए शुक्रवार की तिथि निर्धारित की।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में एक भावुक माहौल देखा गया। कई दोषियों के परिजन वहां मौजूद थे और उनमें से कई रोते हुए भी नजर आए। कुछ दोषी, जिसमें विधायक विनय कुलकर्णी शामिल हैं, अपने परिवार के सदस्यों को सांत्वना देते देखे गए।
यह ध्यान देने योग्य है कि विशेष अदालत ने एक दिन पूर्व ही कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह निर्णय लिया। कुलकर्णी इस मामले में आरोपी नंबर 15 हैं और वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष हैं। अदालत ने उन्हें आपराधिक साजिश का दोषी पाया है।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल वी. राजू ने अदालत से दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई निर्मम हत्या थी और मृतक योगेश गौड़ा की हत्या राजनीतिक दुश्मनी के कारण हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले कुछ अन्य व्यक्तियों ने आत्मसमर्पण किया था, लेकिन सीबीआई जांच के बाद सच्चाई सामने आई। आरोप है कि विधायक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पुलिस तंत्र को प्रभावित किया और सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के दौरान योगेश गौड़ा की आंखों में मिर्च पाउडर डालकर उनकी हत्या की गई। मामले में दस्तावेजों को फर्जी बनाने और सबूत मिटाने के प्रयास भी किए गए।
वहीं, दोषी विधायक विनय कुलकर्णी ने अदालत से दया की अपील करते हुए कहा कि वे पिछले 26 वर्षों से राजनीति में हैं और उन्होंने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया। उन्होंने अपने परिवार का हवाला देते हुए बताया कि उनकी दो बेटियाँ विवाह योग्य हैं और एक बेटा है। साथ ही उन्होंने बताया कि वे एक कृषक हैं और 3,500 गायों की देखभाल करते हैं।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकील श्याम सुंदर ने दलील दी कि आजीवन कारावास अधिकतम सजा है, जो लगभग मृत्युदंड के समान है। उन्होंने अदालत से सुधार की संभावना को ध्यान में रखते हुए नरम सजा देने की अपील की।
अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की निगाहें शुक्रवार को आने वाले अदालत के फैसले पर टिकी हैं।