क्या भाई जगताप को नोटिस जारी करने पर शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस को घेरा?
सारांश
Key Takeaways
- भाई जगताप को कांग्रेस द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
- शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस की लोकतांत्रिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
- कांग्रेस में आंतरिक विवाद बढ़ रहे हैं।
नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में अंदरूनी विवाद उत्पन्न हो गए हैं। भाई जगताप ने बीएमसी चुनाव में कांग्रेस की हार पर मुंबई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ का इस्तीफा माँगा, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस पर भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस में लोकतंत्र की चोरी हो चुकी है।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि जब कांग्रेस के नेता भाई जगताप ने बीएमसी चुनाव के बाद जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की, तो उन्हें नोटिस मिला। वहीं, दूसरी ओर मध्य प्रदेश में कांग्रेस के एक नेता ने महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस में जो नेता हिंदू और महिला विरोधी बयान देते हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। उल्टा, उन्हें राहुल गांधी के साथ घूमने का मौका मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई कांग्रेस में जिम्मेदारी तय करेगा, तो उसे नोटिस दिया जाएगा। यदि आप राहुल गांधी से सवाल पूछते हैं, तो भी नोटिस जारी किया जाएगा, और फिर यह लोग लोकतंत्र का ढिंढोरा पीटते हैं। उन्होंने कहा कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली पार्टी महिला विरोधी बयान देने वाले नेता के खिलाफ कोई नोटिस नहीं लेती, यह कांग्रेस का दोहरा चरित्र है।
गौरतलब है कि कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन पर पार्टी के एक सीनियर पदाधिकारी के खिलाफ अनुशासन का उल्लंघन करते हुए सार्वजनिक रूप से बयान देने का आरोप है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि भाई जगताप ने मीडिया और पब्लिक फोरम पर मुंबई रीजनल कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष प्रोफेसर वर्षा गायकवाड़ के इस्तीफे की मांग की है। यह बयान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रसारित हुआ है। यह इंडियन नेशनल कांग्रेस के स्थापित नियमों, अनुशासन और नैतिक ढांचे का स्पष्ट उल्लंघन है।
भाई जगताप से नोटिस मिलने के 7 (सात) दिनों के अंदर कारण बताने के लिए कहा गया है। साथ ही, इंडियन नेशनल कांग्रेस के संविधान और नियमों के अनुसार, पार्टी अनुशासन और पार्टी एथिक्स के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन क्यों न लिया जाए, इसका जवाब देने को कहा गया है।