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क्या भारत ने अमेरिका के साथ 7,995 करोड़ रुपए का समझौता किया है?

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क्या भारत ने अमेरिका के साथ 7,995 करोड़ रुपए का समझौता किया है?

सारांश

भारत और अमेरिका के बीच हुआ 7,995 करोड़ रुपए का यह रक्षा समझौता भारतीय नौसेना के एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए है। इससे नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में वृद्धि होगी, जो आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।

मुख्य बातें

भारत और अमेरिका के बीच 7,995 करोड़ का रक्षा समझौता।
एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए सपोर्ट।
नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में वृद्धि।
आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
रक्षा मंत्रालय द्वारा अमेरिकी सरकार के साथ हस्ताक्षर।

नई दिल्ली, 28 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत और अमेरिका के बीच शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता संपन्न हुआ है। यह 7,995 करोड़ रुपए का समझौता भारतीय नौसेना के एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी सरकार के साथ 7,995 करोड़ रुपए मूल्य के दो ‘लेटर्स ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस’ पर हस्ताक्षर किए हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारतीय नौसेना के एमएच-60आर मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर बेड़े को फॉलो-ऑन सपोर्ट और फॉलो-ऑन सप्लाई सपोर्ट प्रदान करने के उद्देश्य से है। नई दिल्ली में शुक्रवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में इस पर हस्ताक्षर किए गए। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह अनुबंध अमेरिका के फॉरेन मिलिटरी सेल्स कार्यक्रम के तहत निष्पादित हुआ।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह सस्टेनमेंट सपोर्ट पैकेज नौसेना के एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के लिए व्यापक रखरखाव और समर्थन प्रणाली उपलब्ध कराएगा। इसमें हेलीकॉप्टर के स्पेयर्स और सपोर्ट उपकरणों की आपूर्ति, प्रोडक्शन सपोर्ट, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा, आवश्यक पुर्जों की मरम्मत और पुन: आपूर्ति भी इस समझौते का हिस्सा है। समझौते के तहत भारत में इंटरमीडिएट लेवल रिपेयर सुविधाओं और पीरियॉडिक मेंटेनेंस इंस्पेक्शन सुविधाओं की स्थापना की जाएगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुविधाओं का विकास दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा। साथ ही यह कई आवश्यक वस्तुओं के लिए अमेरिकी सरकार पर निर्भरता को कम करेगा। इससे एमएसएमई और भारतीय कंपनियों को भी रक्षा उत्पादों और सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे। एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की क्षमता में बड़ा इजाफा होने की संभावना है। यह तकनीक और सपोर्ट सिस्टम भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक और हर मौसम में सक्षम एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल उपलब्धता को मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही इससे मेंटेनबिलिटी और विश्वसनीयता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना का एमएच-60आर हेलीकॉप्टर उन्नत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता से लैस है। ये हेलीकॉप्टर अमेरिका से प्राप्त प्रमुख समुद्री परिचालन संपत्तियों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते से इन हेलीकॉप्टरों की विस्तृत तैनाती क्षमता भी मजबूत होगी। इस सपोर्ट पैकेज के बाद हेलीकॉप्टरों का संचालन विभिन्न तटीय ठिकानों से संभव होगा। वहीं, युद्धपोतों से भी एमएच-60आर हेलीकॉप्टर का संचालन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि नौसेना अपने प्राथमिक और द्वितीयक मिशनों के दौरान इन हेलीकॉप्टरों से अधिकतम प्रदर्शन प्राप्त कर सके।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता नौसेना की परिचालन क्षमता को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगा। साथ ही यह भारत के आत्मनिर्भर और मजबूत समुद्री रक्षा ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में भी सहायक होगा।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह समझौता किसके बीच हुआ है?
यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच हुआ है।
समझौते की कुल राशि क्या है?
समझौते की कुल राशि 7,995 करोड़ रुपए है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों के रखरखाव के लिए सपोर्ट प्रदान करना है।
यह समझौता कब किया गया?
यह समझौता 28 नवंबर को किया गया।
इस समझौते से भारत को क्या लाभ होगा?
इससे भारत को अपनी नौसेना की क्षमता को बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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