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क्या भारत और सिंगापुर के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर रक्षा कार्यकारी समूह की बैठक महत्वपूर्ण है?

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क्या भारत और सिंगापुर के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर रक्षा कार्यकारी समूह की बैठक महत्वपूर्ण है?

सारांश

भारत और सिंगापुर के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक सिंगापुर में आयोजित की गई। यह बैठक न केवल सैन्य सहयोग को सशक्त बनाएगी, बल्कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता को भी आगे बढ़ाएगी।

मुख्य बातें

क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सशक्त बनाना उच्च स्तरीय वार्ता का मार्ग प्रशस्त करना नई पहल पर चर्चा 60वीं वर्षगांठ का महत्व

नई दिल्ली, 5 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत और सिंगापुर के बीच डिफेंस वर्किंग ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक सिंगापुर में आयोजित की गई है। यह बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी, जैसा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा बताया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के बीच भी पहले मुलाकात हो चुकी है, जो नई दिल्ली में हुई थी। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का मार्ग प्रशस्त किया है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस 16वीं रक्षा कार्यकारी समूह की बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद और सिंगापुर रक्षा मंत्रालय के पॉलिसी ऑफिस निदेशक कर्नल डैक्सन याप ने की।

बैठक के दौरान, पहले हुई रक्षा मंत्रियों की वार्ता में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही, दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा दृष्टिकोण साझा करने में महत्वपूर्ण साबित हुई। इसके अतिरिक्त, यह बहुआयामी द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे से संबंधित प्रयासों को गति देने का एक उत्कृष्ट अवसर भी है।

इन वार्ताओं का प्रेरणा स्रोत हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लॉरेंस वोंग के बीच नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद जारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी हेतु रोडमैप पर संयुक्त बयान है। दोनों पक्षों ने भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग पर संतोष व्यक्त किया है।

भारत और सिंगापुर ने विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, उद्योग एवं प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर बल दिया। साथ ही, उभरते नए सहयोग क्षेत्रों और वैश्विक साझा संसाधनों से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

यह ध्यान देने योग्य है कि 2025 भारत-सिंगापुर के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ का वर्ष है। इस अवसर पर दोनों सह-अध्यक्षों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है। यह बैठक भारत की एक्ट ईस्ट नीति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

बैठक के इतर, भारत के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद ने सिंगापुर के उप सचिव (पॉलिसी) ब्रिगेडियर जनरल फ्रेडरिक चू से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने चांगी नौसैनिक अड्डे पर स्थित इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर और आसियान रक्षा मंत्रियों के साइबर सुरक्षा एवं सूचना उत्कृष्टता केंद्र का दौरा किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा करना था।
बैठक में किन प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया?
बैठक की सह-अध्यक्षता अमिताभ प्रसाद और कर्नल डैक्सन याप ने की।
क्या इस बैठक का कोई ऐतिहासिक महत्व है?
यह बैठक भारत और सिंगापुर के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ से पहले हुई है, जो इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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