भारत और ब्रिटेन के बीच हरित हाइड्रोजन सम्मेलन: सुरक्षा मानकों पर चर्चा
सारांश
Key Takeaways
- हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चर्चा हुई।
- राष्ट्रीय हाइड्रोजन सुरक्षा केंद्र की स्थापना का महत्व बताया गया।
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास पर जोर दिया गया।
- उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग को बढ़ावा मिला।
- हरित ऊर्जा के सुरक्षित उपयोग के लिए साझा प्रतिबद्धता की गई।
नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनस)। नई दिल्ली में भारत और ब्रिटेन के बीच हरित हाइड्रोजन मानक एवं सुरक्षा प्रोटोकॉल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत और ब्रिटेन की सरकार, उद्योग, शिक्षा, मानक निकायों, परीक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और नियामक एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह सम्मेलन राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा स्थापित राष्ट्रीय हाइड्रोजन सुरक्षा केंद्र (एनसीएचएस) की मदद से आयोजित किया गया। इसमें हरित हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला के लिए नियामक ढांचे, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं, जिनमें उत्पादन, भंडारण, परिवहन और अंतिम उपयोग के अनुप्रयोग शामिल थे।
सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक मोहम्मद रिहान के संबोधन से हुआ। इसके पश्चात, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के निदेशक अभय बकरे, ब्रिटिश उच्चायोग के प्रथम सचिव (व्यापार) जिनूस शरियाती, और अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के वैज्ञानिक सचिव परविंदर मैनी ने हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पहलू हाइड्रोजन सुरक्षा और मानकों के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय नियामकों की भागीदारी थी। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) ने हाइड्रोजन प्रणालियों के लिए सुरक्षा अनुपालन, जोखिम मूल्यांकन और आपदा प्रबंधन पर अपने नियामक दृष्टिकोण साझा किए। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारतीय हाइड्रोजन मानकों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुसार विकसित करने के प्रयासों की जानकारी दी।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में सुरक्षा प्रथाओं पर प्रस्तुतियां और चर्चाएं शामिल थीं। वक्ताओं में सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, एनटीपीसी लिमिटेड, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, और अन्य प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे।
सत्रों में हाइड्रोजन के अंतिम उपयोग अनुप्रयोगों में सुरक्षा प्रथाओं, हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और परिवहन प्रणालियों के सुरक्षित डिजाइन, जोखिम मूल्यांकन पद्धतियों, और हाइड्रोजन सुरक्षा के लिए उन्नत सेंसर प्रौद्योगिकियों के नवाचारों पर चर्चा की गई। सम्मेलन का समापन भारत और यूके के बीच मानकों के विकास, नियामक क्षमता निर्माण और सुरक्षा ढांचों पर सहयोग बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, ताकि हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों का विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर उपयोग हो सके।