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क्या भारतमाला घोटाले की जांच में तेजी आई? रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

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क्या भारतमाला घोटाले की जांच में तेजी आई? रायपुर और महासमुंद में 9 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

सारांश

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के भुगतान में अनियमितताओं को लेकर ईडी ने 9 ठिकानों पर छापेमारी की। क्या यह जांच भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम हो सकता है?

मुख्य बातें

ईडी की छापेमारी से घोटाले की गहराई का पता चलता है।
अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से जनता में विश्वास बढ़ेगा।

रायपुर, 29 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा रायपुर और महासमुंद के कुल 9 परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्यवाही की जा रही है।

ईडी की यह कार्रवाई उन आरोपों की छानबीन के तहत की जा रही है, जिनमें भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के भुगतान में गड़बड़ियों की आशंका व्यक्त की गई है। तलाशी अभियान में हरमीत सिंह खनूजा, उनके सहयोगियों, संबंधित सरकारी अधिकारियों और भूमि मालिकों से जुड़े ठिकाने शामिल हैं।

ईडी द्वारा जारी एक प्रेस नोट में कहा गया, "ईडी, रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ के रायपुर और महासमुंद में कुल नौ परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के संबंध में की जा रही है।"

ज्ञातव्य है कि भारतमाला परियोजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य 50 कॉरिडोर (वर्तमान में छह) बनाकर 550 जिला मुख्यालयों (वर्तमान में 300) को कम से कम 4-लेन हाईवे से जोड़ना और 24 लॉजिस्टिक्स पार्क, कुल 8,000 किमी के 66 इंटर-कॉरिडोर, तथा कुल 7,500 किमी के 116 फीडर मार्गों को जोड़कर 80 प्रतिशत माल ढुलाई (वर्तमान में 40 प्रतिशत) को राष्ट्रीय राजमार्गों पर लाना था।

इस पूरे मामले की जांच में यह सामने आया कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में 43 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। भूमि के टुकड़ों को बांटकर और रिकॉर्ड में हेराफेरी करके, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को कुल 78 करोड़ रुपए का गलत भुगतान दिखाया गया।

एक सिंडिकेट, जिसमें एसडीएम, पटवारी और भूमि माफिया शामिल हैं, ने पुरानी तारीख के दस्तावेजों के माध्यम से यह धोखा किया। आरोपियों में पांच अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें निर्भय कुमार साहू का नाम है, जिन पर 43.18 करोड़ रुपए से अधिक के गबन का आरोप है। अभनपुर के नायकबंधा और उर्ला गांवों में भूमि माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर भूमि को 159 प्लॉट में बांट दिया, जिससे उसका मूल्यांकन 29.5 करोड़ रुपए से बढ़कर 78 करोड़ रुपए हो गया। अभानपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के हिस्से के लिए मुआवजा पहले 324 करोड़ रुपए तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपए बांट दिए गए हैं, जबकि 78 करोड़ रुपए अभी भी रोके गए हैं।

राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान, विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने भारतमाला परियोजना पर चिंता जताई और सीबीआई जांच की मांग की। राजस्व मंत्री टैंक राम वर्मा ने अनियमितताओं को स्वीकार किया और बताया कि अगस्त 2022 में शुरू की गई रायपुर कलेक्टर की जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है। जांच में अधिकारियों पर मालिकाना हक ट्रांसफर में हेराफेरी करने और मुआवज़े के दावों को बढ़ाने का आरोप लगा।

नतीजतन, सरकार ने कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जिनमें नायब तहसीलदार गोबरा नवापारा लखेश्वर प्रसाद किरण और पटवारी जितेंद्र प्रसाद साहू, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश के विकास में ईमानदारी की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने कितने ठिकानों पर छापेमारी की?
ईडी ने रायपुर और महासमुंद में कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की।
भारतमाला परियोजना का उद्देश्य क्या है?
भारतमाला परियोजना का उद्देश्य 550 जिला मुख्यालयों को 4-लेन हाईवे से जोड़ना है।
इस मामले में कितनी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है?
इस मामले में 43 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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