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क्या बिहार की 2003 की मतदाता सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई है?

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क्या बिहार की 2003 की मतदाता सूची चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई है?

सारांश

बिहार में 2003 की मतदाता सूची अब चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 4.96 करोड़ मतदाता बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के अपने विवरण की पुष्टि कर सकते हैं। यह प्रणाली विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता पंजीकरण में सुधार लाएगी। जानें कैसे यह कदम पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

मुख्य बातें

मतदाता सूची में 4.96 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
अब 60 प्रतिशत मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देना होगा।
सूची ऑनलाइन उपलब्ध है और डाउनलोड की जा सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, 18 वर्ष और उससे ऊपर के भारतीय नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण के पात्र हैं।
मतदाता सूची में निरंतर संशोधन आवश्यक है।

पटना, 30 जून (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार की 2003 की मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। इस सूची में 4.96 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल हैं। इससे विधानसभा चुनाव से पूर्व राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में उल्लेखनीय सहायता मिलेगी, क्योंकि अब लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं को कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी।

चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के निर्देशों के अनुसार, 2003 की मतदाता सूची को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) द्वारा बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को हार्ड कॉपी में प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, यह सूची ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी, ताकि कोई भी व्यक्ति इसे डाउनलोड कर सके और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संशोधन के लिए फॉर्म के साथ इसका उपयोग कर सके।

इस सुविधा से मतदाताओं और बीएलओ दोनों को लाभ होगा। जिन मतदाताओं के नाम 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपने विवरण की पुष्टि करने और फॉर्म जमा करने की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों का नाम इस सूची में नहीं है, लेकिन उनके माता-पिता के नाम हैं, उन्हें अपने माता-पिता के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मतदाताओं को केवल अपने लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत हर चुनाव से पहले मतदाता सूची में संशोधन आवश्यक है। पिछले 75 वर्षों से आयोग वार्षिक आधार पर गहन और संक्षिप्त संशोधन करता आ रहा है। यह प्रक्रिया इसलिए आवश्यक है, क्योंकि मतदाता सूची में लगातार बदलाव अपरिहार्य है। मृत्यु, प्रवास, विवाह, नौकरी, शिक्षा या 18 वर्ष की आयु पूरी करने जैसे कारणों से इसमें बदलाव होते रहते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक उम्र के भारतीय नागरिक, जो उस निर्वाचन क्षेत्र के निवासी हैं, मतदाता के रूप में पंजीकरण के पात्र हैं। यह कदम मतदाता सूची को पारदर्शी बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि चुनावी प्रणाली के लिए भी लाभकारी होगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 2003 की मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए दस्तावेज जरूरी हैं?
जी हाँ, यदि आपका नाम 2003 की सूची में है, तो आपके लिए केवल अपने विवरण की पुष्टि करनी होगी।
क्या नए मतदाता बिना दस्तावेज के पंजीकरण कर सकते हैं?
जो लोग अपने माता-पिता के नाम के साथ सूची में हैं, उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं है।
मतदाता सूची में संशोधन क्यों आवश्यक है?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत हर चुनाव से पहले संशोधन जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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