क्या बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए ईवीएम-वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन सफल हुआ?

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क्या बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए ईवीएम-वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन सफल हुआ?

सारांश

क्या बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए ईवीएम और वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन सफल हुआ? जानिए इस प्रक्रिया के पीछे के तथ्य और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ।

Key Takeaways

ईवीएम और वीवीपैट का रैंडमाइजेशन किया गया है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है। राजनीतिक दलों का रैंडमाइजेशन पर सकारात्मक रुख है। बिहार में 45,388 मतदान केंद्र हैं। चुनाव आयोग ने सभी प्रक्रियाओं की निगरानी की है।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए मंगलवार को ईवीएम और वीवीपैट का पहला रैंडमाइजेशन सफलता से पूरा हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के निर्देशानुसार, सभी 20 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) ने 13 अक्टूबर को प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) पास करने वाली मशीनों का यह रैंडमाइजेशन किया।

यह प्रक्रिया राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ईवीएम प्रबंधन प्रणाली (ईएमएस) के माध्यम से संपन्न हुई।

चुनाव आयोग के अनुसार, इस रैंडमाइजेशन में कुल 53,806 बैलेट यूनिट (बीयू), 53,806 कंट्रोल यूनिट (सीयू) और 57,746 वीवीपैट को 122 विधानसभा क्षेत्रों के 45,388 मतदान केंद्रों में वितरित किया गया।

इसके पश्चात, जिला मुख्यालयों पर इन मशीनों की निर्वाचन क्षेत्रवार सूची सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तर के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की गई। यह कदम चुनाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

ईसीआई के मुताबिक, इन ईवीएम और वीवीपैट को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की निगरानी में संबंधित विधानसभा स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद जब उम्मीदवारों की अंतिम सूची तैयार हो जाएगी, तो यह जानकारी सभी उम्मीदवारों के साथ भी साझा की जाएगी। यह प्रक्रिया मतदाताओं के विश्वास को मजबूत करने और किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए की गई है।

गौरतलब है कि बिहार में दूसरा चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं। रैंडमाइजेशन से यह सुनिश्चित होगा कि हर मतदान केंद्र पर मशीनें निष्पक्ष तरीके से कार्य करें। राजनीतिक दलों ने इस कदम का स्वागत किया है और आशा व्यक्त की है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहेगी। वहीं, ईसीआई ने आश्वासन दिया है कि आगे भी इसी तरह की सावधानी बरती जाएगी।

बिहार चुनाव के लिए भाजपा ने मंगलवार को 71 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। वहीं इंडिया गठबंधन में शामिल भाकपा माले ने सीटों पर बातचीत न होने के बाद अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। भाकपा माले ने 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार दिए। इसके अतिरिक्त, एनडीए में शामिल सहयोगी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने छह प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है।

Point of View

यह रैंडमाइजेशन बिहार चुनाव की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी और निर्वाचन आयोग की स्पष्टता चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास मजबूत करेगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

ईवीएम और वीवीपैट का रैंडमाइजेशन क्यों किया जाता है?
ईवीएम और वीवीपैट का रैंडमाइजेशन चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
बिहार चुनाव के दूसरे चरण में कितने मतदान केंद्र हैं?
बिहार चुनाव के दूसरे चरण में 45,388 मतदान केंद्र हैं।
रैंडमाइजेशन में कितनी मशीनें शामिल हैं?
रैंडमाइजेशन में कुल 53,806 बैलेट यूनिट, 53,806 कंट्रोल यूनिट और 57,746 वीवीपैट शामिल हैं।
राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया है?
राजनीतिक दलों ने रैंडमाइजेशन के इस कदम का स्वागत किया है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता की उम्मीद जताई है।
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