बिहार में ईको टूरिज्म को मिलेगी रफ्तार: सम्राट चौधरी ने दिए पीपीपी मोड और सोलराइजेशन के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 5 अक्टूबर 2026 को राज्य के पहाड़ी और प्राकृतिक क्षेत्रों में ईको टूरिज्म तथा सोलराइजेशन परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहाँ आवश्यक हो, जन-निजी भागीदारी (PPP) मोड के ज़रिये ईको टूरिज्म योजनाएँ विकसित की जाएँ और पहाड़ी इलाकों में स्वच्छ ऊर्जा के लिए सौर पैनल लगाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
बैठक का परिदृश्य
यह निर्देश पटना स्थित लोक सेवक आवास के 'संकल्प' सभागार में आयोजित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए गए। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की, जबकि विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभागीय कार्यों की जानकारी दी।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचन्द्र प्रसाद, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
किन स्थलों पर होगा विकास
बैठक में बांका के ओढ़नी डैम, मुंगेर के खड़गपुर डैम, नवादा के ताराकोल डैम और मुंगेर के जालकुंड डैम के आसपास ईको टूरिज्म बुनियादी ढाँचे के विकास पर विस्तृत चर्चा हुई। खड़गपुर डैम के निकट पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 'ग्लास रूम' बनाने की संभावना भी तलाशी गई।
मुख्यमंत्री ने कसरैया धार, खगड़िया को भी ईको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ताराकोल और जालकुंड डैम के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र कार्रवाई की जाए।
भूमि अधिग्रहण और PPP मॉडल
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहाँ सरकारी भूमि पर्याप्त नहीं है, वहाँ आवश्यकतानुसार भूमि खरीद या अधिग्रहण किया जाए और तत्पश्चात PPP मोड के माध्यम से ईको टूरिज्म परियोजनाएँ विकसित की जाएँ। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पर्यटन सुविधाओं के निर्माण में बाँस और लकड़ी जैसी पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ प्राकृतिक सामग्रियों का ही उपयोग हो।
गौरतलब है कि जिन स्थलों पर पर्यटन की दृष्टि से रोप-वे की आवश्यकता है, वहाँ भी रोप-वे निर्माण की संभावनाओं पर काम करने को कहा गया — जो बिहार के पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी और रोमांचक पर्यटन, दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।
सोलराइजेशन और हरित ऊर्जा पर ज़ोर
राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सोलराइजेशन का कार्य कराने के निर्देश दिए गए, ताकि पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा का उपयोग भी बढ़े। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता मान रही है।
पौधारोपण और हरित आवरण का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने राज्य के बड़े तालाबों और जलाशयों के चारों ओर बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने के निर्देश दिए और अधिकारियों से कहा कि निर्धारित पौधारोपण लक्ष्य को जल्द-से-जल्द पूरा किया जाए। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य राज्य के हरित आवरण क्षेत्र में वृद्धि करना है।
उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी परियोजनाओं को गति देने को कहा। उनका कहना था कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार और आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और पर्यटकों को प्राकृतिक परिवेश में बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।