क्या बिहार का जीआई टैग वाला कतरनी चूड़ा बन गया है लोगों की पहली पसंद, देश-विदेश में मांग बढ़ी?

Click to start listening
क्या बिहार का जीआई टैग वाला कतरनी चूड़ा बन गया है लोगों की पहली पसंद, देश-विदेश में मांग बढ़ी?

Key Takeaways

  • कतरनी चूड़ा बिहार की पहचान है।
  • जीआई टैग ने इसकी मांग बढ़ाई है।
  • किसानों को प्रोत्साहन राशि मिल रही है।
  • कतरनी चूड़ा की कीमत 180 से 200 रुपए प्रति किलो है।
  • इसकी खुशबू और मुलायम बनावट इसे खास बनाती है।

भागलपुर, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मकर संक्रांति की तैयारी में इस वक्त बिहार में दही-चूड़ा खरीदने की हलचल तेज है। विशेषकर राजनीतिक नेताओं के घरों में आयोजित इस पारंपरिक भोज में जो चूड़ा परोसा जा रहा है, वह भागलपुर का जीआई टैग प्राप्त प्रसिद्ध कतरनी चूड़ा है। इसकी विशिष्ट सुगंध, मुलायम बनावट और अनूठे स्वाद के चलते कतरनी चूड़ा न केवल बिहार में, बल्कि देश-विदेश में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

भागलपुर के जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) प्रेम शंकर प्रसाद ने बताया कि कतरनी चूड़े का स्वाद अन्य किस्मों से बिलकुल अलग है। इसकी खुशबू और गुणवत्ता इसे खास बनाती है, इसी कारण अधिकतर लोग चूड़ा बनाने के लिए कतरनी चावल को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि जब से केंद्र सरकार ने कतरनी को जीआई टैग दिया है, तब से किसानों में जागरूकता बढ़ी है और इस पारंपरिक धान की खेती को नई पहचान मिली है।

डीएओ प्रेम शंकर प्रसाद ने बताया कि पहले कतरनी धान की खेती मुख्य रूप से जगदीशपुर और चानन प्रखंडों में सीमित थी, लेकिन जीआई टैग मिलने के बाद अब अन्य प्रखंडों में भी इसका उत्पादन शुरू हो गया है। पहले जहां करीब 1,200 एकड़ क्षेत्र में कतरनी धान की खेती होती थी, वहीं अब यह रकबा बढ़कर 5,000 एकड़ से अधिक हो गया है। इससे किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने बताया कि जीआई टैग के बाद बिहार सरकार की ओर से कतरनी धान की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 6,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। सुगंधित चावल और चूड़ा होने के कारण इसकी कीमत में भी इजाफा हुआ है। वर्तमान में ऑरिजिनल कतरनी चावल और चूड़ा 180 से 200 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।

कतरनी चूड़ा के थोक व्यापारी बजरंग खेमका ने बताया कि जीआई टैग मिलने के बाद कतरनी चूड़ा की मांग केवल देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ गई है। इससे न केवल व्यापारियों को लाभ हुआ है, बल्कि देश के अन्नदाताओं को भी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सुगंधित चावल की पहचान मजबूत हुई है।

कतरनी चूड़ा उत्पादक किसान सह दुकानदार चंदन कुमार ने बताया कि मकर संक्रांति के अवसर पर कतरनी चूड़ा और चावल की मांग काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि विदेश भेजने के लिए भी ग्राहकों से ऑर्डर मिल रहे हैं और वे इसकी पैकिंग में जुटे हुए हैं। कतरनी की खुशबू और मुलायम बनावट के कारण लोग इसे बहुत पसंद कर रहे हैं।

चंदन कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार से कतरनी को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी बिक्री में चार गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे न केवल किसानों को लाभ हो रहा है, बल्कि उनसे जुड़े व्यापारियों और दुकानदारों को भी अच्छा मुनाफा मिल रहा है। कुल मिलाकर कतरनी चूड़ा आज भागलपुर की पहचान बन चुका है और मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर इसकी मांग नए शिखर पर पहुंच रही है।

Point of View

बल्कि यह किसानों के लिए आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन भी बन गया है। जीआई टैग के बाद इसके उत्पादन में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग ने इसे एक नई पहचान दी है।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

कतरनी चूड़ा क्या है?
कतरनी चूड़ा भागलपुर का एक प्रसिद्ध चूड़ा है जो जीआई टैग प्राप्त है। इसकी खासियत इसकी सुगंध और मुलायम बनावट है।
जीआई टैग का क्या महत्व है?
जीआई टैग प्राप्त करने से उत्पाद को एक विशिष्ट पहचान मिलती है और इसकी गुणवत्ता और बाजार में मान्यता बढ़ती है।
किसानों को जीआई टैग के बाद क्या लाभ हुआ है?
किसानों को प्रति एकड़ 6,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि और उनके उत्पाद की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कतरनी चूड़ा की कीमत क्या है?
वर्तमान में कतरनी चूड़ा की कीमत 180 से 200 रुपए प्रति किलो तक है।
कतरनी चूड़ा की मांग कहां तक बढ़ी है?
कतरनी चूड़ा की मांग अब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बढ़ गई है।
Nation Press