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क्या बिहार का किऊल महोत्सव सांस्कृतिक विरासत, लोक प्रतिभा और स्थानीय पहचान को संजोने का सशक्त माध्यम है ?

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क्या बिहार का किऊल महोत्सव सांस्कृतिक विरासत, लोक प्रतिभा और स्थानीय पहचान को संजोने का सशक्त माध्यम है ?

सारांश

बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने लखीसराय में आयोजित किऊल महोत्सव में भाग लिया और इसे सांस्कृतिक विरासत का सशक्त माध्यम बताया। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय कलाओं को प्रोत्साहन दिया, बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानिए और क्या कहा उन्होंने!

मुख्य बातें

किऊल महोत्सव बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करता है।
यह आयोजन स्थानीय कलाओं को प्रोत्साहित करता है।
महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का उद्घाटन किया गया।
यह कार्यक्रम पीएम मोदी के 'मन की बात' से जुड़ा है।
बिहार की स्थानीय पहचान को सशक्त बनाने का यह एक प्रयास है।

लखीसराय, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने शनिवार को लखीसराय जिले में आयोजित राजकीय किऊल महोत्सव में भाग लिया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि लखीसराय जिले में आयोजित किऊल महोत्सव का आयोजन अद्वितीय और शानदार रहा। जिले की समृद्ध संस्कृति, लोककला और परंपराओं का अनुभव कर उन्हें अत्यधिक प्रसन्नता हुई। किऊल महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत, लोक प्रतिभा और स्थानीय पहचान को संरक्षित करने का एक प्रभावी माध्यम है। ऐसे आयोजन न केवल हमारी कला-संस्कृति को प्रोत्साहन देते हैं, बल्कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा प्रदान करते हैं। लखीसराय की सांस्कृतिक गरिमा को नमन।

उन्होंने पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के बारे में बताया कि पीएम मोदी २५ जनवरी को इस कार्यक्रम के माध्यम से पूरे राष्ट्र से संवाद करेंगे। उन्होंने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि वे 'मन की बात' से जुड़ें और नए भारत के निर्माण के संकल्प को सशक्त बनाएं।

उपमुख्यमंत्री ने लिट्टी विथ मांझी कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार की आन-बान-शान लिट्टी-चोखा का स्वाद लेकर अपनी समृद्ध लोक-संस्कृति से जुड़ने का सुखद अनुभव प्राप्त हुआ। ऐसे आयोजन हमारी परंपरा, स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का माध्यम हैं। बिहार की संस्कृति, स्वाद और स्वाभिमान ही हमारी असली पहचान है।

उपमुख्यमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उल्लेख करते हुए कहा कि वैशाली में समृद्धि यात्रा के दौरान उन्होंने वैशाली जिले का भ्रमण किया और विकास योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ५४ करोड़ रुपए की लागत से २५ योजनाओं का शिलान्यास और ९८ करोड़ रुपए की लागत से १०३ योजनाओं का उद्घाटन किया गया। साथ ही, जनसंवाद के माध्यम से जिलेवासियों को सरकार की चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। डबल इंजन की सरकार बिहार के हर कोने में तेज, संतुलित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह स्थानीय आर्थिक विकास में भी योगदान दे रहा है। ऐसी पहलों को आगे बढ़ाना आवश्यक है ताकि हमारी विविधता और संस्कृति का संरक्षण हो सके।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किऊल महोत्सव का महत्व क्या है?
किऊल महोत्सव बिहार की सांस्कृतिक विरासत और लोक प्रतिभा को संजोने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस महोत्सव में कौन-कौन से आयोजन होते हैं?
इस महोत्सव में लोक कला, संगीत, और खान-पान से जुड़े कई कार्यक्रम शामिल होते हैं।
क्या इस महोत्सव का पर्यटन पर प्रभाव पड़ता है?
हां, यह महोत्सव पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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