क्या बिहार के लिए गौरव का पल है, नितिन नबीन बने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष?
सारांश
Key Takeaways
- नितिन नबीन ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ग्रहण किया।
- यह बिहार के लिए गर्व का पल है।
- भाजपा का नेतृत्व संगठन के सिद्धांतों पर आधारित है।
- सतीश चंद्र दुबे का महत्वपूर्ण बयान।
- भाजपा ने जनसंघ से जनविश्वास का सफर तय किया है।
पटना, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन ने मंगलवार को अपना कार्यभार संभाला। उन्हें पीएम मोदी सहित भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की ओर से शुभकामनाएं प्राप्त हुईं।
पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि बिहार के लिए इससे बड़ा गर्व का पल और कोई नहीं हो सकता, क्योंकि बिहार के एक बेटे को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का मौका मिला है। इससे बड़ी गर्व की बात और कुछ नहीं हो सकती।
जब पीएम मोदी ने नितिन नबीन को बॉस कहा, तब केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि यह सत्य है कि कोई सीएम बने या मंत्री बने, पीएम भी संगठन की मदद से ही बनते हैं। पीएम मोदी ने संगठन में काम किया है, और वे इसे भलीभांति समझते हैं। भाजपा एक ऐसी पार्टी है जिसमें बड़े पद पर रहने के बावजूद अध्यक्ष का स्थान एक आम कार्यकर्ता के लिए खुला रहता है; हम भी एक आम कार्यकर्ता हैं।
नीट छात्रा की हत्या मामले में केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि बिहार सरकार सख्त कार्रवाई करेगी; जिन्होंने गलत किया है, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
नितिन नबीन को बधाई देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने एक्स पोस्ट में लिखा कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर नितिन नबीन को हार्दिक बधाई। बिहार की मिट्टी से निकले इस होनहार बेटे की जमीनी राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक की यात्रा संगठन, अनुशासन और जनसेवा की मिसाल है। पीएम मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के दृष्टिकोण को नई गति देने में आपका नेतृत्व मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
भाजपा के सफर को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि राष्ट्रवाद की अटूट भावना, अंत्योदय के संकल्प और हिंदुत्व की सांस्कृतिक चेतना को अपनी वैचारिक पूंजी बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने जनसंघ से जनविश्वास तक का प्रेरक सफर तय किया है। यह यात्रा केवल सत्ता की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान की सतत साधना की कहानी है।