क्या बिहार में मोतिहारी के सीताकुंड धाम का विकास पुनौरा धाम की तर्ज पर होगा?

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क्या बिहार में मोतिहारी के सीताकुंड धाम का विकास पुनौरा धाम की तर्ज पर होगा?

सारांश

बिहार सरकार ने मोतिहारी के सीताकुंड धाम के विकास की योजना बनाई है। यह ऐतिहासिक स्थल माता जानकी के पुनौरा धाम की तर्ज पर विकसित होगा, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। क्या यह स्थल अब राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी पहचान बनाएगा?

Key Takeaways

  • सीताकुंड धाम का ऐतिहासिक महत्व
  • बिहार सरकार द्वारा 15 करोड़ की विकास योजना
  • स्थानीय रोजगार के अवसरों का सृजन
  • परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2023
  • पुनौरा धाम की तर्ज पर विकास

पटना, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता सीता के विवाह संस्कार के पश्चात बारात ठहरने वाले स्थल मोतिहारी के सीताकुंड धाम के विकास के लिए बिहार सरकार सक्रिय है। माता जानकी की जन्मभूमि पुनौरा धाम की तर्ज पर इस क्षेत्र का विकास किया जा रहा है।

स्थानीय निवासियों की आशा है कि अब इस स्थल की पहचान पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित होगी। पूर्वी चंपारण जिले के पीपरा थाना के अंतर्गत बेदिवन मधुबन पंचायत में स्थित ऐतिहासिक सीताकुंड धाम के महत्व को ध्यान में रखते हुए इसका विकास किया जा रहा है।

इस परियोजना का कार्यान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। कार्य की शुरुआत पिछले वर्ष सितंबर में हुई है और इस वर्ष दिसंबर तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य है। निगम के जीएम चंदन चौहान ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत परिसर की चारदीवारी, प्रवेश द्वार, सुरक्षा व्यवस्था, तालाब का सौंदर्यीकरण, सड़क और बैठने की सुविधा, कैफेटेरिया, कॉटेज, शौचालय परिसर तथा दुकानों का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 15 करोड़ रुपए की इस परियोजना के पूर्ण होने से सीताकुंड धाम एक आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तीर्थ एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय स्तर पर पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। सीताकुंड धाम मोतिहारी से 22 किलोमीटर दूर है। लगभग 12 फीट ऊंचे टीलानुमा स्थान पर करीब 20 एकड़ के विशाल भूखंड में फैला हुआ यह स्थल सीताकुंड के नाम से जाना जाता है। यहां एक बड़ा तालाब भी है। यहां के अवशेष, प्राचीन मूर्तियों सहित पवित्र कुंड इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

कहा जाता है कि त्रेतायुग में जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की बारात अयोध्या से जनकपुर वापस लौट रही थी, तब नवविवाहित श्रीराम-जानकी की जोड़ी यहां विश्राम के लिए रुकी थी। यहीं पर श्रीराम और सीता के कंगन को खोलने की रस्म पूरी हुई थी। इसे लोकभाषा में 'चौठारी' के नाम से जाना जाता है। यहां शिवालय, बाग-बगीचा एवं कई तालाबों का निर्माण भी हुआ था। आज भी सीताकुंड के आस-पास कई प्राचीन पोखर स्थित हैं।

Point of View

बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा। इस प्रकार की परियोजनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक होती हैं।
NationPress
08/01/2026

Frequently Asked Questions

सीताकुंड धाम का महत्व क्या है?
सीताकुंड धाम त्रेतायुग से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां श्रीराम और सीता ने विश्राम किया था।
इस विकास परियोजना का अनुमानित बजट क्या है?
15 करोड़ रुपए का बजट इस परियोजना के लिए निर्धारित किया गया है।
यह स्थल कहां स्थित है?
यह स्थल मोतिहारी के पूर्वी चंपारण जिले के पीपरा थाना अंतर्गत स्थित है।
परियोजना कब तक पूरी होगी?
इस परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2023 तक पूर्ण करना है।
क्या यह स्थल पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण होगा?
हाँ, इस विकास के बाद, सीताकुंड धाम पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी पहचान बनाएगा।
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