क्या बिहार सत्य-अहिंसा की भूमि है, जहां 'कट्टा' नहीं, विकास की सरकार चाहिए?

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क्या बिहार सत्य-अहिंसा की भूमि है, जहां 'कट्टा' नहीं, विकास की सरकार चाहिए?

सारांश

बेतिया में पीएम मोदी की रैली के बाद एनडीए नेताओं ने राजद के शासन पर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। उन्होंने बिहार में 'कट्टा सरकार' की जगह 'विकास और शांति की सरकार' की आवश्यकता की बात की। जानें क्या कहा एनडीए ने।

मुख्य बातें

बिहार में एनडीए का लक्ष्य विकास और शांति है।
राजद के शासनकाल में रंगदारी की समस्याएं थीं।
महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं।
बिजली की स्थिति में सुधार हुआ है।
एनडीए परिवारवाद का विरोध करती है।

बेतिया, 8 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के बेतिया में पीएम मोदी की रैली के उपरांत एनडीए नेताओं ने राजद के शासनकाल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि बिहार में 'कट्टा सरकार' नहीं, बल्कि 'विकास और शांति की सरकार' की आवश्यकता है।

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "यहां पर राजद की रंगदारी का कोई स्थान नहीं है। जितनी भी अधिक मतदान हो रही है, वह एनडीए के पक्ष में है। जब जनता किसी सरकार से असंतुष्ट होती है तो मतदान का प्रतिशत घटता है, लेकिन इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है। यह इस बात का प्रमाण है कि जनता को एनडीए सरकार पसंद है।"

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा और एनडीए परिवारवाद का विरोध करते हैं। यह एक सुशासन की सरकार है। चुनाव के परिणाम आने के बाद कट्टा और रंगदारी करने वाले लोग अपने घरों में दरवाजे बंद करके बैठ जाएंगे।

केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे ने विश्वास जताते हुए कहा, "यह संख्या 200 पार करेगी। जनता का उत्साह और विश्वास देखकर स्पष्ट है कि दोनों चरणों में एनडीए भारी बहुमत से सरकार बनाएगा।"

सांसद सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हर वर्ग के लिए कार्य किया है। आज बिहार की महिलाएं सशक्त हैं और कानून-व्यवस्था मजबूत है। पहले जब तेजस्वी यादव के माता-पिता की सरकार थी, तब चरवाहा विद्यालय चलता था और अपराधियों को मुख्यमंत्री आवास से संरक्षण मिलता था, लेकिन नीतीश कुमार की सरकार ने सब कुछ बदल दिया है।

विधायक उमाकांत सिंह ने राजद शासन को 'जंगलराज' बताया। उन्होंने कहा, "उस समय गोली-लाठी की सरकार थी। बच्चों के हाथों में किताबों की जगह कट्टा थमाया जाता था, हर दिन हत्या और अपहरण होते थे। लेकिन यह धरती महात्मा गांधी की कर्मभूमि है। सत्य, अहिंसा और विकास की भूमि है। यहां कट्टा और बंदूक की नहीं, शांति और विकास की सरकार चाहिए।"

भाजपा कार्यकर्ता साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि 2014 के बाद डबल इंजन की सरकार ने बिहार का चेहरा बदल दिया है। हर गांव तक बिजली पहुंची है, कई जगह बिजली बिल माफ किए गए हैं। महिलाओं के लिए कई योजनाएं आरंभ की गई हैं। अब बिहार की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें डर नहीं, बल्कि विश्वास है कि डबल इंजन की सरकार ही उनके सपनों को पूरा कर सकती है।

भाजपा नेता रेणु देवी ने कहा, "हमें कट्टा सरकार नहीं चाहिए, हमें शांति और अहिंसा की सरकार चाहिए। बिहार की महिलाएं अब किसी झूठे वादे के झांसे में नहीं आने वाली हैं। यह महात्मा गांधी की भूमि है, यहां विकास और शांति चाहिए, हिंसा नहीं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें अब सुलझाने का वक्त आ गया है। यह आवश्यक है कि सभी पार्टियां एकजुट होकर राज्य के विकास में योगदान दें।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में एनडीए का क्या उद्देश्य है?
एनडीए का उद्देश्य बिहार में विकास और शांति की सरकार स्थापित करना है।
राजद के शासनकाल में क्या समस्याएं थीं?
राजद के शासनकाल में कट्टा और रंगदारी की समस्याएं थीं।
बिहार की महिलाएं कैसे सशक्त हो रही हैं?
बिहार की महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन रही हैं और उन्हें कई योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
एनडीए का प्रमुख नारा क्या है?
एनडीए का प्रमुख नारा 'विकास और शांति' है।
बिहार में बिजली की स्थिति क्या है?
बिहार में डबल इंजन की सरकार ने हर गांव में बिजली पहुंचाई है।
राष्ट्र प्रेस