भाजपा का लक्ष्य देश के भविष्य का निर्माण करना है, न कि किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना: नितिन गडकरी
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का उद्देश्य देश का भविष्य संवारना है।
- गडकरी ने पार्टी की 40 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला।
- विपक्ष ने पार्टी के खिलाफ जहर घोलने का प्रयास किया है।
- संस्कृति और विरासत की रक्षा करना भाजपा का लक्ष्य है।
- गडकरी ने ईरान दौरे में संस्कृत की महत्ता बताई।
नागपुर, ६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पार्टी की ४० साल की यात्रा और इसके मूल उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना का लक्ष्य केवल किसी एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना नहीं था।
गडकरी ने बताया कि ४० साल पहले राम जेठमलानी और शांति भूषण की उपस्थिति में पार्टी की नींव रखी गई थी। उस समय, विभिन्न नेताओं ने २० स्थानों पर जाकर पार्टी के विचारों, संविधान और उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की।
गडकरी ने मुंबई के बांद्रा रिक्लेमेशन में हुई उस बैठक को याद किया, जहां एमसी छागला मुख्य अतिथि थे। छागला ने कहा था कि जो पार्टी देश का नेतृत्व करेगी, उसके साथ मैं यहां उपस्थित हूं।
गडकरी ने बताया कि उस समय अटल बिहारी वाजपेयी भी वहां मौजूद थे, जिन्होंने कहा था, "अंधकार छंटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा।" आज यह भविष्यवाणी सच साबित हो चुकी है। उन्होंने जोर दिया कि पार्टी का उद्देश्य देश का भविष्य संवारना है, न कि किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाना।
उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग कहते थे कि अगली बार देश का प्रधानमंत्री अटल जैसा होना चाहिए, तो वाजपेयी जवाब देते थे कि यह महत्वपूर्ण नहीं कि प्रधानमंत्री कौन होगा, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि देश कैसा होगा। पिछले ४० वर्षों में बीजेपी ने इसी उद्देश्य पर काम किया है और कई सपनों को साकार किया है।
गडकरी ने विपक्ष की आलोचनाओं पर कहा कि विरोधी पार्टी ने जितना संभव हो सका, उतना जहर घोलने की कोशिश की है। बीजेपी न तो जातिवादी है और न ही सांप्रदायिक। पार्टी किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। हमारी संस्कृति में लोग अलग-अलग पूजा-पद्धतियों को मानते हैं। कोई मंदिर जाता है, कोई मस्जिद, कोई गुरुद्वारा, लेकिन हम सब भारतीय हैं। हमारी संस्कृति, विरासत और इतिहास एक है।
गडकरी ने अपने ईरान दौरे का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि शिपिंग मंत्री रहते हुए उन्होंने चाबहार बंदरगाह बनाने के लिए ईरान का दौरा किया। वहां उन्हें पता चला कि फारसी भाषा संस्कृत से आई है और संस्कृत हमारी मूल भाषा है। उन्होंने बताया कि तेहरान यूनिवर्सिटी में संस्कृत का विभाग भी है।
गडकरी ने यह भी कहा कि चाहे कश्मीर हो या गुवाहाटी, देश की धरती, विरासत और इतिहास एक हैं। उन्होंने विविधता में एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी का लक्ष्य हमेशा देशहित, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना रहा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इसी भावना के साथ काम करें और देश की एकता और विकास के लिए मेहनत करें। उन्होंने ४० साल की यात्रा को प्रेरणादायक बताया और कहा कि आगे भी हमें देश और समाज के लिए इसी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करना होगा।