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बीआरओ प्रोजेक्ट हिमांक ने लेह में 41वां स्थापना दिवस क्यों मनाया?

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बीआरओ प्रोजेक्ट हिमांक ने लेह में 41वां स्थापना दिवस क्यों मनाया?

सारांश

लेह में बीआरओ प्रोजेक्ट हिमांक ने अपने 41वें स्थापना दिवस पर महान कार्यों का जश्न मनाया। यह प्रोजेक्ट न केवल सड़कों का निर्माण करता है, बल्कि लद्दाख के स्थानीय लोगों की जिंदगी को भी आसान बनाता है। जानिए इस प्रोजेक्ट की उपलब्धियों और इसके महत्व के बारे में।

मुख्य बातें

प्रोजेक्ट हिमांक ने 41 वर्षों में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
यह भारतीय सेना और स्थानीय विकास का मजबूत आधार है।
सड़कें और पुल स्थानीय लोगों की जीवनशैली को आसान बनाते हैं।
प्रोजेक्ट ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों का ध्यान रखता है।
सर्दियों में लेह एयरपोर्ट को खुला रखना एक बड़ी चुनौती है।

लेह, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट हिमांक ने गुरुवार को लेह में अपने मुख्यालय में 41वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।

यह प्रोजेक्ट, जो 4 दिसंबर 1985 को शुरू हुआ, लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों में सड़कों का निर्माण और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रतीक बन चुका है। इसे लोग प्यार से “माउंटेन टैमर्स” कहते हैं। यह प्रोजेक्ट, जो दुनिया की सबसे कठिन जगहों पर 11,000 से 19,500 फीट की ऊंचाई पर कार्यरत है, भारतीय सेना की शक्ति और दूरदराज के गांवों के विकास का एक मजबूत आधार बना हुआ है।

पिछले वर्ष, प्रोजेक्ट हिमांक ने उल्लेखनीय कार्य किया है। चार नई सड़कों का निर्माण पूरा किया गया, जिनकी कुल लंबाई 161 किलोमीटर है। इसके अलावा, 941 मीटर22 बड़े पुल भी बनकर तैयार हुए हैं। इन सड़कों और पुलों के माध्यम से हानले, चुमार, डेमचोक, हॉट स्प्रिंग और दौलत बेग ओल्डी जैसे महत्वपूर्ण सीमाई क्षेत्रों तक पूरे वर्ष पहुंच आसान हो गई है। अब सेना के काफिले और आम नागरिक भी तेजी से आ जा सकते हैं।

प्रोजेक्ट हिमांक केवल सड़कों का निर्माण नहीं करता, बल्कि लोगों की सहायता भी करता है। ऊंचे दर्रों पर मेडिकल और डेंटल कैंप लगाए जाते हैं। उमलिंग ला, खारदुंग ला, चांग ला और तांगलांग ला जैसी जगहों पर बीआरओ कैफे और ऑक्सीजन सपोर्ट सेंटर खोले गए हैं, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहे हैं। जब भी बाढ़, भूस्खलन या सड़क बहने की समस्या आई, हिमांक की टीमें सबसे पहले पहुंची और कुछ ही घंटों में मार्ग को फिर से खोल दिया।

सर्दियों में, लद्दाख की जीवनरेखा लेह एयरपोर्ट को खुला रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। हिमांक की टीमें रात दो बजे से बर्फ हटाना शुरू कर देती हैं ताकि सुबह की पहली उड़ान समय पर उतर सके। नेशनल हाईवे-3 और डीबीओ, गलवान, हॉट स्प्रिंग और हानले जैसे अग्रिम इलाकों तक जाने वाली सड़कों पर दिन-रात बर्फ हटाई जाती है, जिससे कड़कड़ाती ठंड में भी सेना और आम लोगों का आना-जाना नहीं रुकता।

प्रोजेक्ट अपने श्रमिकों का भी पूरा ध्यान रखता है। ठंड से बचाने के लिए इंसुलेटेड शेल्टर बनाए गए हैं, गर्म पानी और सफाई की उत्तम व्यवस्था की गई है और बेहतरीन सर्दियों के कपड़े दिए जा रहे हैं। इन सभी सुविधाओं के कारण श्रमिक ऊंचाई और ठंड में भी सुरक्षित और आराम से कार्य कर पा रहे हैं।

41वें स्थापना दिवस पर प्रोजेक्ट हिमांक ने फिर से संकल्प लिया कि वह इसी समर्पण और तेज गति से देश की सीमाओं को सशक्त बनाता रहेगा और लद्दाख के लोगों की जिंदगी को और सरल बनाएगा। लेह में आयोजित भव्य समारोह में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरों पर गर्व साफ दिखाई दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्थानीय लोगों की जरूरतों को भी पूरा करती हैं। यह एक ऐसा उदाहरण है जो दर्शाता है कि कैसे देश की सीमाएं और स्थानीय विकास एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रोजेक्ट हिमांक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
प्रोजेक्ट हिमांक का मुख्य उद्देश्य लद्दाख में सड़कों का निर्माण करना और उन्हें सुरक्षित रखना है।
बीआरओ प्रोजेक्ट की खासियत क्या है?
यह प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे ऊंची सड़कों पर कार्य करता है और स्थानीय लोगों को चिकित्सा और अन्य सेवाएं भी प्रदान करता है।
प्रोजेक्ट हिमांक ने पिछले साल क्या उपलब्धियाँ हासिल कीं?
पिछले साल, प्रोजेक्ट हिमांक ने 161 किलोमीटर नई सड़कों और 22 बड़े पुलों का निर्माण किया।
राष्ट्र प्रेस
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